इस्लामाबाद/तेहरान:

मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और इजरायल-अमेरिका के साथ जारी टकराव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। ईरान ने पाकिस्तान को एक बड़ी राहत देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से उसके 20 जहाजों को गुजरने की विशेष अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस समुद्री रास्ते पर युद्ध के बादलों के कारण व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बेहद जोखिम भरी बनी हुई है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे का प्रतीक बताया है। वहीं, भारत के लिए भी राहत की खबर यह है कि उसके दो LPG टैंकर इस जलमार्ग को सुरक्षित रूप से पार कर चुके हैं।

क्या है पूरा मामला?

ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे। इसी बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जानकारी साझा की कि ईरान सरकार पाकिस्तानी झंडे वाले 20 जहाजों को इस मार्ग से गुजरने देने पर सहमत हो गई है।

तय समझौते के अनुसार, रोजाना दो पाकिस्तानी जहाज इस संकरे जलमार्ग को पार कर सकेंगे। इशाक डार ने इस कदम को शांति की दिशा में एक 'रचनात्मक और विश्वास बढ़ाने वाला' कदम बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बातचीत और कूटनीति ही समस्याओं के समाधान का एकमात्र रास्ता है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की बातचीत

इस बड़ी घोषणा के पीछे दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई लंबी चर्चा को मुख्य कारण माना जा रहा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच लगभग एक घंटे तक टेलीफोन पर बातचीत हुई।

शहबाज शरीफ ने इस बातचीत के दौरान ईरान पर हुए इजरायली हमलों की कड़ी निंदा की और ईरानी जनता के प्रति एकजुटता जाहिर की। माना जा रहा है कि पाकिस्तान द्वारा ईरान का खुलकर समर्थन करने के बदले में ईरान ने उसे यह व्यापारिक रियायत दी है। पाकिस्तान के लिए यह फैसला आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि होर्मुज के रास्ते होने वाली सप्लाई में देरी या रुकावट उसकी पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकती थी।

भारत के लिए क्या है स्थिति?

एक ओर जहाँ पाकिस्तान को विशेष अनुमति मिली है, वहीं दूसरी ओर भारतीय हितों को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की तरफ बढ़ रहे दो प्रमुख LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) टैंकरों ने सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों, विशेषकर रसोई गैस और कच्चे तेल के लिए, काफी हद तक खाड़ी देशों और इस समुद्री मार्ग पर निर्भर है। संघर्ष के बावजूद भारतीय जहाजों का सुरक्षित निकलना यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को पूरी तरह ठप होने से बचाने की कोशिशें जारी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील 'चोक पॉइंट' है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% से 30% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।

जब भी ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ता है, ईरान अक्सर इस जलमार्ग को बंद करने या व्यापारिक जहाजों को रोकने की धमकी देता है। ऐसे में पाकिस्तान को 20 जहाजों की छूट मिलना एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।

वैश्विक कूटनीति और व्यापारिक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस समय अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत कर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ एक क्षेत्रीय मोर्चा बनाने की कोशिश में है। पाकिस्तान को दी गई यह छूट इसी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। वहीं, पाकिस्तान जो इस समय गंभीर मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहा है, उसके लिए अपने जहाजों का सुरक्षित निकलना किसी जीवनदान से कम नहीं है।

इस फैसले से न केवल ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि समुद्री बीमा (Marine Insurance) की बढ़ती कीमतों के बोझ से भी कुछ हद तक राहत मिल सकती है। युद्ध के कारण इस क्षेत्र में माल ढुलाई का किराया और बीमा दरें आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक बाजार में सामान महंगा हो रहा है।


ईरान का यह कदम दिखाता है कि युद्ध के शोर के बीच भी कूटनीति के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। पाकिस्तान के लिए जहाँ यह व्यापारिक सुगमता है, वहीं भारत के जहाजों का सुरक्षित निकलना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छा संकेत है। हालांकि, इजरायल और ईरान के बीच का तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है, इसलिए आने वाले दिनों में होर्मुज की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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