फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। बुधवार को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम देते हुए दो मालवाहक जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया। इस घटना में सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि ईरान ने भारत के गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट की ओर आ रहे एक जहाज को भी निशाना बनाया और उस पर भारी गोलीबारी की। यह हमला उस समय हुआ जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच सीमित युद्धविराम को लेकर चर्चाएं चल रही थीं।

घटनाक्रम के अनुसार, ओमान के तट से लगभग 15 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में आईआरजीसी की गनबोट्स ने उन जहाजों को घेरा जिन्हें तेहरान ने 'नियम तोड़ने वाला' घोषित किया था। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (UKMTO) ने इस सैन्य हस्तक्षेप की पुष्टि की है। जहाज के कैप्टन द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी नौसैनिकों ने जहाज के 'ब्रिज' हिस्से को निशाना बनाकर सीधी गोलीबारी की, जिससे जहाज के महत्वपूर्ण नेविगेशन और नियंत्रण उपकरणों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस भीषण हमले में चालक दल का कोई भी सदस्य घायल नहीं हुआ है और सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'फार्स' और 'तस्नीम' के अनुसार, जिन दो जहाजों को जब्त किया गया है, उनके नाम 'MSC Francesca' और 'Epaminodes' हैं। ईरान ने इन जहाजों पर इजरायल से जुड़े होने का आरोप लगाया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का दावा है कि इन पोतों ने समुद्री सुरक्षा के लिए निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया, नेविगेशन सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की और बिना किसी वैध परमिट के संवेदनशील जलक्षेत्र में काम कर रहे थे। ईरान ने यह भी तर्क दिया कि जहाज के कप्तानों ने सशस्त्र बलों द्वारा दी गई शुरुआती चेतावनियों को नजरअंदाज किया, जिसके बाद बल प्रयोग करना अनिवार्य हो गया था।

यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए एक बड़ा संकट माना जा रहा है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस पारगमन मार्गों में से एक है। विशेष रूप से भारत के लिए यह सुरक्षा चिंता का विषय है क्योंकि जब्त किए गए जहाजों में से एक सीधे तौर पर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के लिए रवाना हुआ था। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा फर्म 'वैनगार्ड टेक' ने इस मामले में एक नया मोड़ देते हुए बताया कि हमले से पहले संबंधित जहाजों को सूचित किया गया था कि उनके पास जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति है, लेकिन इसके बावजूद उन पर हमला कर दिया गया।

कानूनी और कूटनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच टूटते अविश्वास का परिणाम है। हाल ही में दोनों देशों के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिसके तहत ईरान ने इस जलमार्ग को वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोल दिया था। हालांकि, तेहरान ने वाशिंगटन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए इसे पुनः बंद कर दिया। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी है, जो युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन है। इसी के जवाब में ईरानी केंद्रीय सैन्य कमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के 'सख्त प्रबंधन' की घोषणा की है। वर्तमान में दोनों जहाजों को ईरानी तट की ओर ले जाया गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका है।


Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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