Strait of Hormuz में जहाजों पर पाबंदी; ईरान के फैसले से क्या LPG पर पड़ेगा असर ?
ईरान ने Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही को किया सीमित। प्रति दिन केवल 15 जहाजों को मंजूरी। जानें भारत में एलपीजी और तेल सप्लाई पर इसका क्या होगा असर।

समुद्र में तैरता एक बड़ा मालवाहक जहाज औरसाथ ही ईरान का भौगोलिक मानचित्र
Iran limits ships in Strait of Hormuz : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध विराम की कोशिशों के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। सामरिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर ईरान ने एक ऐसा सख्त फैसला लिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय परिवहन और तेल आपूर्ति श्रृंखला में खलबली मचा दी है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी 'तास' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अब इस संकरे समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या को सीमित कर दिया है। नए नियमों के तहत अब एक दिन में केवल 15 जहाजों को ही इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। ईरान के इस कदम को वैश्विक अर्थव्यवस्था की 'आर्थिक नस' पर नियंत्रण के रूप में देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के ऊर्जा आयात पर पड़ना तय है।
Strait of Hormuz की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान और ओमान के बीच स्थित इस 34 किलोमीटर चौड़ी समुद्री पट्टी से दुनिया के कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। यह जलमार्ग न केवल तेल बल्कि वैश्विक कृषि के लिए आवश्यक उर्वरकों और रसायनों की आवाजाही का भी एकमात्र प्रमुख रास्ता है। ऐसे में जहाजों की संख्या को 15 तक सीमित करने का अर्थ है कि आपूर्ति की रफ्तार में भारी गिरावट आएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उछाल आने की आशंका बढ़ गई है। वैश्विक ट्रांसपोर्टरों ने इस निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे समुद्री व्यापार के लिए एक बड़ा झटका करार दिया है।
इस संकटपूर्ण स्थिति के बीच भारत सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सरकार देश में एलपीजी और कच्चे तेल की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत में प्रति दिन 58 लाख से अधिक घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों का वितरण किया जा रहा है और फिलहाल आपूर्ति सुचारू बनी हुई है। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता को बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। हाल ही में एक ही दिन के भीतर 6,700 टन कमर्शियल एलपीजी की बिक्री दर्ज की गई, जो लगभग 3.5 लाख सिलेंडरों के बराबर है। इसके अतिरिक्त, छोटे उपभोक्ताओं के लिए पांच किलो वाले 1.06 लाख सिलेंडरों की बिक्री भी सुनिश्चित की गई है।
हालांकि भारत वर्तमान में स्थिति को नियंत्रित करने का दावा कर रहा है, लेकिन यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान का यह कड़ा रुख लंबे समय तक बना रहता है, तो भारत के सामरिक तेल भंडार और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ना अपरिहार्य है। यह जलमार्ग केवल एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर को खाड़ी देशों से जोड़ने वाली वह कड़ी है जो वैश्विक विकास दर को निर्धारित करती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इस 'नेविगेशन संकट' का क्या समाधान निकालती है और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को इस झटके से कैसे सुरक्षित रख पाता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
