हॉर्मुज की लहरों पर कूटनीतिक जीत! ट्रंप की पाबंदी बेअसर, भारतीय जहाजों के लिए ईरान खोलेगा 'स्पेशल कॉरिडोर'।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घेराबंदी के बावजूद भारतीय जहाजों को मिलेगी अनुमति, राजदूत फथाली ने दिए सहयोग के संकेत।

समुद्री मार्ग से गुजरते मालवाहक जहाज, हॉर्मुज़ तनाव के बीच ईरान ने भारत समेत कुछ देशों को मार्ग देने की बात कही।
वैश्विक व्यापार के सबसे संवेदनशील मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया और निर्णायक मोड़ आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज की पूर्ण नाकेबंदी और ईरान के सभी बंदरगाहों को सील करने की घोषणा के बाद दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली ने स्पष्ट किया है कि भारत और ईरान के बीच इस कठिन समय में भी निरंतर संपर्क बना हुआ है और भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए जल्द ही एक नई विशेष व्यवस्था लागू की जा सकती है।
ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली ने नई दिल्ली में आयोजित एक संबोधन के दौरान वैश्विक मीडिया को आश्वस्त किया कि भारत सरकार के साथ उनके संबंध सुदृढ़ और सकारात्मक बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद में शांति वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका की ओर से की गई आक्रामक घोषणाओं ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण जरूर बनाया है, लेकिन ईरान अपने रणनीतिक साझेदारों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। फथाली के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के साथ-साथ भारत को भी इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक विजय मानी जा रही है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का वह समुद्री संकरा रास्ता है जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों को आसमान पर पहुँचा सकता है। राजदूत फथाली ने वर्तमान संकट के लिए सीधे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन देशों की हालिया सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियों ने मध्य पूर्व की स्थिरता को भंग किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि अमेरिका ईरान की संप्रभुता का सम्मान करते हुए उनकी शर्तों को स्वीकार करता है, तो भविष्य में संवाद के द्वार फिर से खुल सकते हैं।
कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो समुद्री कानूनों (UNCLOS) के तहत अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में निर्बाध आवागमन का अधिकार सभी देशों को प्राप्त है, लेकिन युद्ध जैसी स्थितियों में तटीय देशों द्वारा सुरक्षात्मक कदम उठाए जाते रहे हैं। ईरान की ओर से भारत को दी गई यह विशेष रियायत दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक और आर्थिक संबंधों का परिणाम है। इस नई व्यवस्था के तहत भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों के लिए विशेष सुरक्षा गलियारा या पहचान प्रणाली विकसित की जा सकती है।
इस घटनाक्रम का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के नए समीकरणों को भी परिभाषित कर रहा है। जहाँ एक तरफ अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान भारत जैसे क्षेत्रीय शक्ति केंद्रों के साथ मिलकर इन प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने की रणनीति अपना रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान द्वारा घोषित 'नई व्यवस्था' धरातल पर कितनी प्रभावी साबित होती है और अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी के बीच भारतीय जहाज इस मार्ग का उपयोग कैसे करते हैं। फिलहाल, भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक राहत है जो ऊर्जा संकट की आशंकाओं को काफी हद तक कम कर सकती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
