क्या होर्मुज बनेगा ‘टोल रूट’?ईरान के फैसले से अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर उठे सवाल
सीजफायर के बीच ईरान की जहाजों से वसूली की योजना पर विवाद, वैश्विक समुद्री व्यापार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ सकता है संकट।

होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरता हुआ एक विशाल तेल टैंकर; ईरान ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाने की योजना प्रस्तावित की है।
मध्य पूर्व के अशांत समुद्र में एक नया भू-राजनीतिक तूफान दस्तक दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनने के बावजूद, कूटनीतिक गलियारों में एक ऐसा पेच फंस गया है जिसने वैश्विक व्यापारिक समुदाय की नींद उड़ा दी है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों से 'टोल टैक्स' वसूलने की योजना का प्रस्ताव रखा है। यह कदम न केवल समुद्री परिवहन की लागत को बढ़ा सकता है, बल्कि यह उन अंतरराष्ट्रीय संधियों और कानूनों को भी सीधी चुनौती देता है जो दशकों से वैश्विक नौवहन की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखते आए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक धमनी के समान है, जहाँ से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान का तर्क है कि वह इस क्षेत्र में सुरक्षा प्रदान करने और समुद्री पर्यावरण की रक्षा के लिए भारी खर्च करता है, जिसकी भरपाई अंतरराष्ट्रीय जहाजों को टोल के रूप में करनी चाहिए। हालांकि, वैश्विक शक्तियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस योजना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका मानना है कि ईरान का यह प्रस्तावित प्लान समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS) के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, जो जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध मार्ग (Innocent Passage) के अधिकार की वकालत करता है।
कानूनी परिप्रेक्ष्य में देखें तो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में जहाजों के गुजरने पर कर लगाने की अनुमति नहीं देते हैं। वर्ष 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के तहत, होर्मुज जैसे संकीर्ण समुद्री रास्तों को 'इंटरनेशनल स्ट्रेट' माना जाता है, जहाँ से गुजरने वाले जहाजों को 'ट्रांजिट पैसेज' का अधिकार प्राप्त होता है। यदि ईरान इस योजना को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो यह न केवल अमेरिका बल्कि भारत जैसे बड़े व्यापारिक भागीदारों के हितों को भी प्रभावित करेगा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है, और यहाँ किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क या अवरोध भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा बोझ डालेगा।
भारत का रुख इस मामले में हमेशा से स्पष्ट और संतुलित रहा है। नई दिल्ली ने बार-बार 'नेविगेशन की स्वतंत्रता' और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन पर जोर दिया है। भारतीय कूटनीतिज्ञों का मानना है कि किसी भी एकपक्षीय कार्रवाई से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है, जो पहले से ही विभिन्न संघर्षों के कारण दबाव में है। भारत इस क्षेत्र में अपने वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए 'ऑपरेशन संकल्प' जैसे मिशन पहले ही चला रहा है, और वह किसी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेगा जो समुद्री व्यापार को जटिल या महंगा बनाए।
ईरान की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब युद्धविराम के कारण क्षेत्र में शांति की मद्धम उम्मीदें जगी थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टोल प्लान दरअसल एक कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है ताकि ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील हासिल की जा सके। हालांकि, इस तरह के कदम के परिणाम विपरीत भी हो सकते हैं। यदि खाड़ी क्षेत्र में जहाजों को टोल देने के लिए मजबूर किया गया, तो अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियां प्रीमियम दरों में भारी वृद्धि कर देंगी, जिससे अंततः पूरी दुनिया में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
अंततः, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और वहां से होने वाली वसूली का मुद्दा केवल आर्थिक नहीं बल्कि संप्रभुता और शक्ति प्रदर्शन का भी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस संकट का समाधान निकालने के लिए कूटनीतिक मेज पर एकजुट होना होगा। यदि ईरान अपने टोल प्लान पर अड़ा रहता है, तो यह युद्धविराम की नींव को कमजोर कर सकता है और मध्य पूर्व में एक नए आर्थिक और सैन्य टकराव का सूत्रपात कर सकता है। वैश्विक स्थिरता के लिए यह आवश्यक है कि समुद्र के कानून सुरक्षित रहें और व्यापारिक मार्ग राजनीतिक सौदेबाजी का जरिया न बनें।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
