UN में पाकिस्तान की सिंधु जल संधि पर गुहार: भारत के फैसले से 24 करोड़ लोगों पर जल संकट का दावा|
भारत के कड़े रुख से पाकिस्तान परेशान, UN में लगाई गुहार। 24 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट का किया दावा।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसन इकबाल सिंधु जल संधि के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए।
सिंधु जल संधि पर भारत के रुख के बाद पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र की एक मंत्रिस्तरीय बैठक में पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसन इकबाल ने दावा किया कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने से उनके देश के 24 करोड़ लोगों की आजीविका और जल सुरक्षा गंभीर संकट में है। उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इसे एकतरफा और गैर-कानूनी कदम बताया। पाकिस्तानी पक्ष का तर्क है कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की जीवनरेखा है, जिस पर देश की 90 प्रतिशत कृषि और 30 प्रतिशत से अधिक बिजली उत्पादन निर्भर है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में पिछले वर्ष अप्रैल में पहलगाम में हुआ आतंकी हमला है, जिसमें 26 पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय लिया था। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह से और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक यह संधि निलंबित ही रहेगी। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की नीति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि आतंकवाद और पानी का प्रवाह एक साथ नहीं चल सकते।
पाकिस्तान का मुख्य आरोप है कि भारत अब संधि के तहत आवश्यक हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा नहीं कर रहा है, जिससे बाढ़ और सूखे के प्रबंधन में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान ने चेनाब नदी पर भारत की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर भी आपत्ति जताई है। वहीं, भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पश्चिमी नदियों पर भी अपनी परियोजनाओं के विकास को जारी रखने की बात कही है। 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते में पूर्वी नदियों का पानी भारत और पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। वर्तमान में भारत ने इस संधि के तहत संयुक्त निरीक्षण के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों को अनुमति देने से भी इनकार कर दिया है। यह स्थिति दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को और अधिक जटिल बना रही है, जहाँ एक ओर सुरक्षा का मुद्दा है तो दूसरी ओर जल संसाधनों पर निर्भरता का अस्तित्वगत संकट।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
