पाकिस्तान में पानी को लेकर अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है, जिससे देश के दो प्रमुख प्रांतों सिंध और बलूचिस्तान में कृषि व्यवस्था और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इस गंभीर स्थिति के पीछे भारत द्वारा सिंधु जल संधि के क्रियान्वयन पर लगाई गई कूटनीतिक रोक को मुख्य कारण माना जा रहा है। आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को स्पष्ट करते हुए भारत सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया था कि आतंकवाद और जल कूटनीति एक साथ नहीं चल सकते। भारत के इस सख्त कदम के एक वर्ष बीत जाने के बाद अब पाकिस्तान के बड़े हिस्से में आर्थिक और सामाजिक तबाही का खतरा तेजी से मंडराने लगा है।

इस रणनीतिक और कूटनीतिक गतिरोध की शुरुआत अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बड़े आतंकवादी हमले के बाद हुई थी। इस हमले के विरोध में भारत ने करीब पैंसठ वर्षों से निर्बाध रूप से चली आ रही सिंधु जल संधि की समीक्षा करते हुए कड़ा रुख अपनाया। भारतीय नेतृत्व ने वैश्विक मंच पर संदेश दिया था कि निर्दोष नागरिकों के खून और जल का प्रवाह एक साथ संभव नहीं है। हाल ही में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस नीति को और अधिक स्पष्ट करते हुए कहा कि मानवता के शत्रुओं और आतंकवाद के संरक्षकों को भारत के जल संसाधनों का लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। रक्षा मंत्री के इस कड़े बयान से साफ है कि नई दिल्ली फिलहाल इस मुद्दे पर अपने रुख में कोई नरमी लाने के मूड में नहीं है।

पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट डॉन की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस रोक का सबसे विनाशकारी प्रभाव सिंध और बलूचिस्तान के कृषि प्रधान क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान की लगभग एक तिहाई आबादी इस जल संकट की सीधी चपेट में आ चुकी है। पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची सहित पूरे सिंध प्रांत के राजनेता, किसान और जल विशेषज्ञ जल आपूर्ति की लगातार घटती मात्रा को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं। सिंचाई नेटवर्क पूरी तरह से दबाव में है, विशेष रूप से सिंधु नदी पर निर्मित सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सुक्कुर बैराज इस समय सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। यह बैराज दोनों प्रांतों में लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई का मुख्य आधार है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सिंध के मुख्य नहर नेटवर्क में पानी की कमी खतरनाक स्तर को पार कर चुकी है। उत्तर पश्चिमी नहर में वर्तमान में चौंसठ दशमलव एक प्रतिशत, राइस कैनाल में अड़तीस प्रतिशत और दादू कैनाल में बयासी प्रतिशत तक पानी की भारी कमी दर्ज की गई है। इस तीव्र जल संकट के कारण पाकिस्तान के भीतर आंतरिक कलह भी चरम पर पहुंच गई है। सिंध प्रांत के सिंचाई विभाग ने देश के सबसे शक्तिशाली प्रांत पंजाब पर अपने निर्धारित कोटे से अधिक पानी चोरी करने का गंभीर आरोप लगाया है। आंकड़ों के अनुसार, पंजाब प्रांत को तय व्यवस्था के तहत चौंतालीस हजार क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, जबकि वह अवैध रूप से तिरपन हजार तीन सौ चौरानवे क्यूसेक पानी निकाल रहा है, जो उसके वास्तविक हक से इक्कीस प्रतिशत से भी अधिक है।

भारत के इस कूटनीतिक दबाव ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों मोर्चों पर लाचार कर दिया है। जहाँ एक तरफ उसकी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था ढहने के कगार पर है, वहीं दूसरी तरफ उसके अपने ही राज्य पानी के असमान बंटवारे को लेकर आपस में उलझ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस्लामाबाद ने अपनी सीमा पार आतंकवाद की नीति में कोई ठोस और प्रामाणिक सुधार नहीं किया, तो आने वाले समय में यह जल संकट पूरे देश के लिए एक ऐसी आंतरिक और आर्थिक त्रासदी का रूप ले लेगा जिससे उबर पाना उसके लिए नामुमकिन होगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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