स्थिरता, सुधार और साहस—नए भारत की आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर ऊंची उड़ान।

नई दिल्ली | 30 जनवरी 2026

संसद के पटल पर आज जब देश का वार्षिक आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) रखा गया, तो उसने न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की एक सुनहरी तस्वीर पेश की, बल्कि वैश्विक मंदी की आहटों के बीच दुनिया को 'भारतीय विकास मॉडल' का लोहा मानने पर मजबूर कर दिया। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी (GDP) विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। यह लगातार चौथा वर्ष होगा जब भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से दौड़ने वाला राष्ट्र बना रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सर्वेक्षण को 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का स्नैपशॉट बताते हुए एक समृद्ध और विकसित भारत के संकल्प की पुष्टि की है।

मुख्य आर्थिक संकेतक: एक नजर में सफलता की गाथा

सर्वेक्षण के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि भारत ने न केवल अपनी घरेलू मांग को मजबूत किया है, बल्कि बाहरी आर्थिक झटकों को झेलने के लिए भी खुद को तैयार कर लिया है।

  • ऐतिहासिक रूप से कम मुद्रास्फीति: देश की महंगाई दर 1.7 प्रतिशत के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिसने आम नागरिक को बड़ी राहत दी है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) $701.4 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया है, जो वैश्विक बाजार में भारत की साख को मजबूती प्रदान करता है।
  • बैंकिंग क्षेत्र में सुधार: बैंकों के खराब ऋण (Bad Loans/NPA) घटकर मात्र 2.2 प्रतिशत रह गए हैं, जो बैंकिंग सेक्टर के स्वास्थ्य में आए क्रांतिकारी सुधार का प्रमाण है।
  • रोजगार सृजन: 'प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) जैसी योजनाओं ने औद्योगिक क्रांति की नींव रखी है, जिसके परिणामस्वरूप बीते वर्ष में 1.26 मिलियन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए।

सामाजिक प्रगति: बहुआयामी गरीबी में भारी गिरावट

आर्थिक सर्वेक्षण केवल डॉलर और प्रतिशत तक सीमित नहीं है; यह मानव पूंजी (Human Capital) के विकास पर भी केंद्रित है। सर्वेक्षण के अनुसार, सरकार की समावेशी नीतियों के कारण भारत में 'बहुआयामी गरीबी' (Multidimensional Poverty) घटकर लगभग आधी रह गई है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विस्तार ने ग्रामीण भारत की जीवन प्रत्याशा और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है।

आधिकारिक चेतावनी: वैश्विक जोखिम और तकनीक की चुनौती

जहाँ सर्वेक्षण भविष्य के प्रति आशावादी है, वहीं इसमें कुछ गंभीर चुनौतियों के प्रति भी आगाह किया गया है।

  • भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्ध और व्यापारिक तनाव आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बाधित कर सकते हैं।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): सर्वेक्षण में चेतावनी दी गई है कि तेजी से बढ़ती AI तकनीक श्रम बाजार के लिए चुनौती बन सकती है, जिसके लिए कार्यबल को तेजी से 'री-स्किल' करने की आवश्यकता है।

कानूनी और नीतिगत ढांचा

यह आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार के नेतृत्व में तैयार किया गया है, जो आगामी बजट की दिशा तय करने वाला एक वैधानिक दस्तावेज है। यह दर्शाता है कि सरकार के 'सप्लाई-साइड' सुधारों और 'पूंजीगत व्यय' (Capital Expenditure) पर निरंतर फोकस ने निजी निवेश को आकर्षित करने में सफलता पाई है।

7.4 प्रतिशत की विकास दर का यह अनुमान केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन सुधारों का प्रतिफल है जो भारत ने पिछले दशक में बोए थे। चुनौतियों और संभावनाओं के बीच, भारत का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 एक ऐसे राष्ट्र की कहानी कहता है जो आत्मनिर्भरता की ओर दृढ़ता से बढ़ रहा है। अब सबकी नजरें कल पेश होने वाले आम बजट पर टिकी हैं, जो इस 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' को और अधिक ईंधन प्रदान करेगा।

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