कर्तव्य पथ पर भारत की शक्ति और साझेदारी का भव्य प्रदर्शन: 77वें गणतंत्र दिवस पर सैन्य सामर्थ्य, सांस्कृतिक विविधता और वैश्विक संबंधों की गूंज
भारत ने 77वां गणतंत्र दिवस कर्तव्य पथ पर भव्य परेड के साथ मनाया। सैन्य टुकड़ियों, डीआरडीओ मिसाइलों और 2,500 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने विविधता दिखाई। यूरोपीय संघ के नेताओं की मौजूदगी में भारत-EU साझेदारी पर जोर दिया गया, जबकि राष्ट्रपति ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया।

नई दिल्ली |
भारत ने अपने 77वें गणतंत्र दिवस को कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड के साथ ऐतिहासिक उत्साह और गरिमा के साथ मनाया। देश की सैन्य शक्ति, वैज्ञानिक उपलब्धियों और सांस्कृतिक विविधता का यह संगम न केवल राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बना, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और रणनीतिक साझेदारियों का भी सशक्त संदेश लेकर सामने आया।
परेड का भव्य स्वरूप: सैन्य शक्ति से सांस्कृतिक वैभव तक
कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में थल, जल और वायु सेनाओं की टुकड़ियों ने अनुशासित मार्च के जरिए भारत की रक्षा क्षमता का प्रदर्शन किया। डीआरडीओ द्वारा विकसित मिसाइल प्रणालियाँ और अत्याधुनिक सैन्य साजो-सामान परेड का प्रमुख आकर्षण रहीं।
इसके साथ ही, देशभर से आए 2,500 से अधिक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की बहुरंगी पहचान को जीवंत कर दिया।
वैश्विक मंच पर भारत-यूरोप की साझेदारी
इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग के लगातार मजबूत होते रिश्तों की सराहना की और भविष्य में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
वीरता का सम्मान: अशोक चक्र से नवाज़े गए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला
समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को उनके असाधारण साहस और सेवा के लिए अशोक चक्र से सम्मानित किया। उन्हें यह सम्मान Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक सफल अभियान में योगदान के लिए प्रदान किया गया, जिसने भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई।
प्रधानमंत्री का संदेश और समकालीन चर्चाएँ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराया। हालांकि, परेड के कुछ स्टंट प्रदर्शनों को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियाँ भी सामने आईं। इसके अलावा, राष्ट्रपति भवन में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान सांस्कृतिक परिधान को लेकर एक राजनीतिक विवाद भी चर्चा में रहा।
भारत की दिशा और दुनिया को संदेश
77वें गणतंत्र दिवस का यह आयोजन भारत की सैन्य मजबूती, सांस्कृतिक समृद्धि और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक बनकर उभरा। कर्तव्य पथ से दिया गया यह संदेश स्पष्ट था—भारत न केवल अपनी परंपराओं पर गर्व करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर जिम्मेदार और सशक्त भूमिका निभाने के लिए भी पूरी तरह तैयार है।

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