ग्लोबल मार्केट में भारत-चीन की जुगलबंदी; क्या होर्मुज संकट के बीच नाइजीरिया बनेगा तेल निर्यातक?
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) के तकनीकी सहयोग और डैंगोटे रिफाइनरी की क्षमता से नाइजीरिया पहली बार बना पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक।

लागोस स्थित डैंगोटे रिफाइनरी का हवाई दृश्य
Dangote Refinery Lagos : वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर एक ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है। जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसी महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधर में लटका दिया है, वहीं दूसरी ओर अफ्रीका के तटों से उठी एक नई औद्योगिक लहर ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नाइजीरिया, जो दशकों से अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर था, अब भारत और चीन की संयुक्त इंजीनियरिंग ताकत के दम पर एक प्रमुख पेट्रोलियम निर्यातक के रूप में उभरकर सामने आया है। बिजनेस इनसाइडर अफ्रीका की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नाइजीरिया ने मार्च के महीने में पहली बार परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के 'नेट एक्सपोर्टर' बनने का गौरव हासिल किया है, जो वैश्विक व्यापार प्रवाह में एक बड़े उलटफेर का संकेत है।
इस अविश्वसनीय परिवर्तन के केंद्र में है लागोस स्थित डैंगोटे रिफाइनरी, जिसका स्वामित्व अफ्रीका के सबसे धनी व्यक्ति अलीको डांगोटे के पास है। यह रिफाइनरी वर्तमान में अपनी पूरी क्षमता यानी 6,50,000 बैरल प्रतिदिन के साथ काम कर रही है। इसकी धमक अब केवल अफ्रीकी देशों तक सीमित नहीं है; सेनेगल से लेकर मोजाम्बिक तक के बाजारों को ईंधन की आपूर्ति करने के बाद अब इसके उत्पाद नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और एशिया के विभिन्न हिस्सों में अपनी जगह बना रहे हैं। यह रिफाइनरी न केवल तेल शोधन का केंद्र है, बल्कि यह चीनी औद्योगिक विशालता और भारतीय इंजीनियरिंग की सूक्ष्मता का एक अनूठा संगम भी है। जहां आठ से अधिक चीनी कंपनियों ने इसके विशालकाय ढांचे को खड़ा करने के लिए आवश्यक आधार प्रदान किया, वहीं भारतीय विशेषज्ञों ने इसके जटिल इंजीनियरिंग प्रबंधन और संचालन को सुचारू बनाया है।
परियोजना की निरंतरता और तकनीकी उत्कृष्टता को बनाए रखने में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। जनवरी में डांगोटे समूह ने 'इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड' (EIL) के साथ 35 करोड़ डॉलर के बड़े अनुबंध का नवीनीकरण किया है। ईआईएल इस परियोजना में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग कंसल्टेंट के रूप में अपनी सेवाएं दे रही है, जो इस मेगा-प्रोजेक्ट की रीढ़ मानी जाती है। निर्माण के चरम समय के दौरान यहां मानवीय श्रम का एक लघु विश्व नजर आता था, जिसमें 30,000 स्थानीय नाइजीरियाई श्रमिकों के साथ-साथ 6,400 भारतीय और 3,250 चीनी पेशेवरों ने दिन-रात काम किया। हालांकि, 11,000 प्रशिक्षित भारतीय श्रमिकों की नियुक्ति पर कुछ क्षेत्रीय सवाल भी उठे, लेकिन प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि इतने जटिल और विशालकाय रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के लिए वैश्विक स्तर की विशेषज्ञता अनिवार्य थी।
इस सफलता की नींव वर्षों पहले रखी गई थी, जब 2016 से 2018 के बीच करीब 800 नाइजीरियाई ग्रेजुएट्स को प्रशिक्षण के लिए भारत भेजा गया था। मुंबई स्थित भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) में इन युवाओं ने रिफाइनरी संचालन और रखरखाव की बारीकियों को सीखा। भारत में जामनगर जैसी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के अनुभव ने इन पेशेवरों को वह आत्मविश्वास दिया, जो आज नाइजीरियाई जमीन पर परिणाम दिखा रहा है। विशेष रूप से, भारतीय इंजीनियर देवकुमार वीजी एडविन ने डांगोटे इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष के रूप में इस तकनीकी ढांचे को खड़ा करने और इसे क्रियान्वित करने में अपनी विशेष छाप छोड़ी है।
नाइजीरिया का एक आयातक से निर्यातक राष्ट्र में तब्दील होना केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह विकासशील देशों की आपसी साझेदारी का एक नया अध्याय भी है। पश्चिमी देशों द्वारा दी जाने वाली लंबी समय-सीमाओं को दरकिनार करते हुए भारत और चीन के सहयोग ने जिस गति और पैमाने पर इस कार्य को पूरा किया है, उसने वैश्विक इंजीनियरिंग के मानकों को पुनर्परिभाषित कर दिया है। यह घटनाक्रम न केवल अफ्रीका की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि अशांत वैश्विक परिस्थितियों में तेल आपूर्ति के वैकल्पिक और भरोसेमंद मार्ग भी प्रशस्त करता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
