डॉलर के आगे पस्त हुआ रुपया: लगातार 5वें दिन ऑल टाइम लो का रिकॉर्ड टूटा, आम जनता की जेब पर पड़ेगा सीधा असर|
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण घरेलू मुद्रा लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंची।

डॉलर बनाम रुपया ग्राफिक में मुद्रा गिरावट प्रदर्शित करती दो प्रतीकात्मक पोटलियां।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच घरेलू मुद्रा बाजार से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में गिरावट का यह सिलसिला लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में भी जारी रहा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर चौतरफा दबाव साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी और भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही पूंजी की निकासी ने रुपये की स्थिति को बेहद नाजुक बना दिया है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी संघर्ष के बाद से घरेलू मुद्रा के मूल्य में तीव्र अवमूल्यन दर्ज किया गया है, जिसके चलते यह चालू वर्ष में एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन चुकी है।
विदेशी मुद्रा बाजार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार शुरुआती कारोबार के दौरान अंतर्बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर रुख के साथ खुला। कारोबार की शुरुआत में ही रुपया पूर्व बंद भाव से 44 पैसे की भारी गिरावट दर्ज करता हुआ प्रति डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुई थी, लेकिन नए कारोबारी सत्र ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए और गिरावट का एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया। इस बीच दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक आंशिक बढ़त के साथ मजबूत स्थिति में बना हुआ है, जो उभरते बाजारों की मुद्राओं के लिए लगातार मुसीबतें खड़ी कर रहा है।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों और वित्तीय विश्लेषकों ने रुपये की इस बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आने वाले समय के लिए गंभीर संकेत दिए हैं। बोफा ग्लोबल रिसर्च के वरिष्ठ विश्लेषकों द्वारा जारी एक शोध पत्र के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहने की पूरी आशंका है। यदि यह भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की महंगाई इसी तरह जारी रही, तो इस वर्ष के अंत तक भारतीय रुपया प्रति डॉलर के स्तर तक और नीचे गिर सकता है। बाजार पर दबाव का मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली है, जिन्होंने हालिया हफ्तों में भारतीय वित्तीय बाजार से अरबों डॉलर की पूंजी वापस निकाल ली है, जिससे डॉलर की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है।
इस अभूतपूर्व गिरावट को थामने और घरेलू मुद्रा को सहारा देने के लिए देश के केंद्रीय बैंक और सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बाजार के जानकारों और मुद्रा डीलरों का स्पष्ट कहना है कि यदि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर बाजार में सीधा हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो रुपये की गिरावट की गति और अधिक तीव्र हो सकती थी। केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए लगातार डॉलर की आपूर्ति कर रहा है। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने भी वित्तीय मोर्चे पर बड़े कदम उठाते हुए बहुमूल्य धातुओं जैसे सोने और चांदी के आयात पर आयात शुल्क में वृद्धि कर दी है। इस नीतिगत कदम का मुख्य उद्देश्य देश के चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना है ताकि विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को रोककर रुपये को तात्कालिक मजबूती प्रदान की जा सके।
मुद्रा बाजार में आए इस ऐतिहासिक संकट का सीधा असर भारतीय आयातकों और देश की खुदरा महंगाई पर पड़ना तय माना जा रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है और डॉलर के महंगा होने से कच्चे तेल का आयात देश के लिए काफी खर्चीला होता जा रहा है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार इस व्यापक अवमूल्यन के कारण देश के भीतर परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप की सीमा और सरकार के राजकोषीय उपाय ही यह तय करेंगे कि भारतीय मुद्रा आने वाले समय में खुद को इस ऐतिहासिक गिरावट से उबार पाने में कितनी सक्षम सिद्ध होती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
