ट्रेन के सैलून कोच में रुद्राभिषेक पर मचा बवाल: रेलवे ने बताया बुकिंग का सच, जानिए क्या हैं नियम
सैलून कोच में रुद्राभिषेक पर रेलवे ने कहा- यह निजी कमर्शियल बुकिंग थी, सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य।

एक निजी संस्था द्वारा बुक किए गए सैलून कोच में पंडितों द्वारा रुद्राभिषेक किया जा रहा है।
भारतीय रेलवे की सैलून कारों के निजी इस्तेमाल को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। ट्रेन के एक वीआईपी सैलून कोच में आयोजित हुए रुद्राभिषेक और पूजा-पाठ के दृश्य सामने आने के बाद यात्रियों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने सुरक्षा और नियमों को लेकर सवाल उठाए हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में नंदीग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट क्लास एसी कूपे में 'सुहागरात' की सजावट के मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं, जिसके बाद रेलवे ने सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया था। इस नई घटना के बाद रेलवे ने स्पष्ट किया है कि सैलून कोच के उपयोग और उसके भीतर होने वाली गतिविधियों के लिए क्या प्रोटोकॉल तय किए गए हैं।
पश्चिम रेलवे द्वारा इस मामले में दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संबंधित सैलून कार किसी सरकारी विभाग या अथॉरिटी को आवंटित नहीं की गई थी, बल्कि यह एक निजी संस्था द्वारा की गई व्यावसायिक बुकिंग थी। रेलवे रिकॉर्ड के मुताबिक, इस सैलून कार के लिए 3,08,580 रुपये का एडवांस पेमेंट जमा किया गया था। इस कोच को 10 जुलाई, 2026 को पश्चिम एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12926) के साथ नई दिल्ली से मुंबई की एकतरफा यात्रा के लिए जोड़ा गया था। रेलवे ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को पूरी तरह खारिज किया है जिनमें इसे सरकारी या वीआईपी कोच बताया गया था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इसे ऑपरेशनल व्यवहार्यता और रेलवे नियमों के अनुपालन के आधार पर आईआरसीटीसी के माध्यम से व्यावसायिक तौर पर किराए पर लिया गया था।
रेलवे नियमों के अनुसार, यदि कोई यात्री या संस्था फुल टैरिफ रेट (FTR) सेवा के तहत पूरा सैलून कोच निजी इस्तेमाल के लिए बुक करती है, तो उन्हें कानूनी दायरे में रहकर अपने निजी कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति होती है। हालांकि, इस इजाजत के साथ ही सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि किसी भी अनुष्ठान या गतिविधि से सार्वजनिक सुरक्षा, सह-यात्रियों की सुविधा या ट्रेन के संचालन में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। कोच के भीतर आग का खतरा पैदा करने वाली सामग्री, जैसे कि जलती हुई मोमबत्तियां या ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। बुकिंग के समय ही एक रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट लिया जाता है ताकि किसी भी अनहोनी या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में पेनल्टी सुनिश्चित की जा सके।
आईआरसीटीसी की सेवाओं के तहत सैलून कारें एक घर जैसी सुविधा प्रदान करती हैं, जिनमें बैठक कक्ष, स्नानघर सहित दो शयनकक्ष और एक सुसज्जित रसोईघर होता है। ये कोच उन यात्रियों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं जो परिवार के साथ निजता और विशिष्टता चाहते हैं। इन कोचों में एसी और जनरल अटेंडेंट के अलावा खाना पकाने की भी सुविधा होती है, जिससे यह यात्रा के दौरान एक निजी अनुभव प्रदान करते हैं। बहरहाल, चलती ट्रेन में पूजा-पाठ के आयोजन को लेकर छिड़ा यह विवाद रेलवे की कमर्शियल बुकिंग नीतियों पर सवाल उठाता है। रेलवे प्रशासन का मानना है कि जब तक सभी सुरक्षा और ऑपरेशनल निर्देश सुरक्षित हैं और निजी बुकिंग नियमों के अनुरूप है, तब तक ऐसी गतिविधियां निजी दायरे में स्वीकार्य हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों में कोई ढील नहीं दी जा सकती।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
