मिडिल ईस्ट तनाव और अमेरिकी नाकेबंदी के बीच 46,313 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारतीय टैंकर सुरक्षित निकला, 13 मई तक विशाखापत्तनम पहुंचने की संभावना है।

MT Shavshakti LPG Tanker News : मिडिल ईस्ट के दहकते रेगिस्तान और अशांत समंदर के बीच, जहाँ अमेरिका और ईरान के युद्ध की आहटों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सांसें अटका रखी हैं, वहां से भारत के लिए एक राहत भरी और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। जिस 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी के लिए अभेद्य किले में तब्दील कर रखा है, उस रणक्षेत्र से भारत का विशालकाय एलपीजी टैंकर 'एमटी सर्वशक्ति' सुरक्षित बाहर निकल आया है। यह घटनाक्रम केवल एक व्यावसायिक जहाज की आवाजाही भर नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे खतरनाक एनर्जी कॉरिडोर में भारत की रणनीतिक पहुंच और कूटनीतिक वजन की एक बड़ी मिसाल बनकर उभरा है।

शनिवार, 2 मई 2026 की दोपहर जब मार्शल द्वीप के झंडे तले चल रहे इस जहाज ने होर्मुज के संकरे जलमार्ग को पीछे छोड़ा, तो वैश्विक तेल बाजारों में हलचल तेज हो गई। 46,313 मीट्रिक टन एलपीजी से लदा यह जहाज ओमान की खाड़ी की ओर सफलतापूर्वक बढ़ चुका है। इस जहाज की सुरक्षा कितनी संवेदनशील है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पर सवार चालक दल के 20 सदस्यों में से 18 भारतीय नागरिक हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विशाखापत्तनम को अपनी मंजिल बताने वाला यह 'महाजहाज' 13 मई 2026 तक भारतीय तट पर लंगर डाल सकता है, जिससे देश की रसोई गैस आपूर्ति को बड़ी मजबूती मिलेगी।

रणनीतिक रूप से देखा जाए तो 'सर्वशक्ति' का यह सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। ब्लूमबर्ग की ट्रैकिंग रिपोर्ट के अनुसार, इसे ईरान के लारक और केशम द्वीपों के अत्यंत करीब से गुजरते हुए देखा गया, जहाँ अमेरिकी नाकेबंदी सबसे सख्त है। संघर्ष की शुरुआत के बाद से ही भारतीय जहाजों ने सुरक्षा के तौर पर एक नई तकनीक अपनाई है, जिसमें वे रेडियो संकेतों पर लगातार 'भारतीय चालक दल' की मौजूदगी और 'मंजिल भारत' होने की घोषणा करते रहते हैं। यह उपाय संभवतः अमेरिकी और ईरानी दोनों पक्षों को संघर्ष के बीच किसी भी गलतफहमी से बचने का संकेत देता है।

यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि 'सर्वशक्ति' अमेरिकी नौसेना की हफ्तों लंबी नाकेबंदी को सफलतापूर्वक पार करने वाला पहला ज्ञात भारतीय जहाज बनने की कगार पर है। अमेरिकी कार्रवाई के कारण जहाँ दर्जनों टैंकर फंसे हुए हैं, वहीं भारत के इस जहाज का निकलना नई दिल्ली की उस संतुलित विदेश नीति की जीत है, जो तनावपूर्ण क्षेत्रों में भी अपने नागरिकों और हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जानती है।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को दो ध्रुवों में बांट दिया है, लेकिन 'सर्वशक्ति' की यह यात्रा दर्शाती है कि समंदर के इस खेल में भारत की स्थिति कितनी महत्वपूर्ण है। यदि 13 मई को यह जहाज विशाखापत्तनम बंदरगाह पर सफलतापूर्वक पहुंचता है, तो यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी होगा, बल्कि युद्धग्रस्त अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में भारतीय नौवहन के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत भी करेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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