क्या अब हवाई सफर पर लग सकता है ब्रेक ? जाने आखिर क्यों एयरलाइंस ने मांगी सरकार से मदद
पश्चिम एशिया युद्ध के बीच ATF की कीमतों में 295% की वृद्धि से भारतीय एयरलाइंस संकट में। FIA ने सरकार से एक्साइज ड्यूटी और VAT कम करने की तत्काल मांग की है।

एयर इंडिया का विमान
ATF price hike 2026 : भारतीय आसमान में उड़ने वाली घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को एक 'अत्यंत जरूरी' पत्र लिखकर आगाह किया है कि यदि सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो देश की प्रमुख एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट को मजबूरन अपनी उड़ानें रद्द करनी पड़ेंगी और विमानों को जमीन पर खड़ा (ग्राउंड) करना होगा। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की विभीषिका ने कच्चे तेल के बाजार में जो आग लगाई है, उसकी तपिश अब भारतीय विमानन कंपनियों के बैलेंस शीट को झुलसा रही है।
इस संकट की जड़ें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए अप्रत्याशित उछाल में छिपी हैं। FIA के आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड महज 72 डॉलर प्रति बैरल से छलांग लगाकर 118 डॉलर पर पहुंच गया है। इसका सबसे घातक असर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन पर पड़ा है, जिसकी कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 260 डॉलर के पार चली गई—जो कि लगभग 295 फीसदी की भारी-भरकम वृद्धि है। हालांकि वर्तमान में यह 235 डॉलर के करीब है, लेकिन यह स्तर भी एयरलाइंस के लिए बर्दाश्त से बाहर है। सबसे चिंताजनक पहलू 'क्रैक स्प्रेड' (कच्चे तेल और ईंधन के बीच का अंतर) है, जो पहले 11-18 डॉलर हुआ करता था, वह अब बढ़कर 132 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। FIA ने इसे तेल कंपनियों का अनुचित शुद्ध मुनाफा करार देते हुए इसे पूरी तरह से नाजायज ठहराया है।
आर्थिक मोर्चे पर एयरलाइंस 'दोहरी मार' झेल रही हैं। सामान्य परिस्थितियों में एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में ईंधन का हिस्सा 30 से 40 फीसदी होता है, जो अब बढ़कर 55 से 60 फीसदी तक जा पहुंचा है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये के ऐतिहासिक निचले स्तर पर होने के कारण विमानन कंपनियों का विदेशी कर्ज और रखरखाव का खर्च भी आसमान छू रहा है। इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को पूरी तरह से घाटे के सौदे में तब्दील कर दिया है। संकट की गंभीरता को देखते हुए FIA ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: पहला, दिसंबर 2024 में बंद हुए 'क्रैक बैंड मैकेनिज्म' को दोबारा बहाल किया जाए; दूसरा, घरेलू उड़ानों पर लगने वाली 11 फीसदी एक्साइज ड्यूटी को अस्थायी रूप से हटाया जाए; और तीसरा, दिल्ली और तमिलनाडु जैसे प्रमुख राज्यों में वैट (VAT) की दरों को कम किया जाए।
विमानन क्षेत्र का यह संकट केवल कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था की गति पर पड़ने वाला है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में ईंधन पर भारी कर की दरों ने एयरलाइंस के पहियों को जाम करने की स्थिति पैदा कर दी है। यदि समय रहते सरकार ने नीतिगत राहत नहीं दी, तो आने वाले दिनों में हवाई किराया न केवल आम जनता की पहुंच से बाहर हो जाएगा, बल्कि भारतीय विमानन उद्योग को एक गहरे वित्तीय अवसाद का सामना करना पड़ सकता है। यह पत्र केवल एक अपील नहीं, बल्कि देश की लाइफलाइन कही जाने वाली हवाई सेवा को बचाने की एक आखिरी गुहार है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
