फ्रांस में होने वाले जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा होगी परंतु समझौते की अंतिम घोषणा अभी नहीं होगी।

वैश्विक आर्थिकी को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े व्यापारिक समझौते को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। फ्रांस में आयोजित होने वाले आगामी जी7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक के एजेंडे में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ करना मुख्य रूप से शामिल रहेगा। हालांकि, राजनयिक गलियारों में चल रही उन अटकलों को विराम मिल गया है जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि इस महामुलाकात के दौरान ही बहुप्रतीक्षित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अंतिम घोषणा कर दी जाएगी। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ आधिकारिक बयान ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

रॉयटर्स द्वारा साझा की गई आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने पत्रकारों को जानकारी दी है कि जी7 बैठक के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं के बीच व्यापक आर्थिक चर्चा तो होगी, लेकिन वहां किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद नहीं है। इस कूटनीतिक निर्णय के पीछे की मुख्य वजह यह है कि फ्रांस में होने वाले इस शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि यानी यूएसटीआर (USTR) जेमिसन ग्रीर भारत का एक आधिकारिक दौरा करने वाले हैं। जेमिसन ग्रीर की इस आगामी भारत यात्रा को इस बात का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक शर्तों को लेकर जमीनी स्तर पर बातचीत अभी सक्रिय रूप से जारी है और इस समझौते को पूरी तरह से परिपक्व होने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा।

अमेरिकी कूटनीतिक हलकों की ओर से आए ये बयान इस बात की पुष्टि करते हैं कि दोनों देश जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने के बजाय एक बेहद मजबूत और दीर्घकालिक आर्थिक ढांचे के निर्माण में जुटे हैं। अमेरिकी अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर अपने व्यापारिक हितों को लेकर काफी महत्वाकांक्षी है और अमेरिकी प्रशासन भी द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक ऊंचाइयों पर ले जाने में इस संभावित डील की भूमिका को भली-भांति समझता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के अनुसार, अमेरिकी पक्ष भारत के साथ एक ऐसी व्यापक डील की वकालत कर रहा है जो दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी और व्यावहारिक हो। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि एक बहुत अच्छी और संतुलित डील पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए तकनीकी स्तर पर कुछ और बैठकों की आवश्यकता होगी।

इस पूरे आर्थिक एजेंडे का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी नवनियुक्त अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के कंधों पर है। अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यापारिक नीतियों के विशेषज्ञ जेमिसन ग्रीर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आर्थिक टीम के प्रमुख के रूप में चुना है। इससे पूर्व वे किंग एंड स्पैल्डिंग जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कानूनी फर्म में अंतरराष्ट्रीय व्यापार टीम के पार्टनर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जी7 में मोदी-ट्रंप की मुलाकात के बाद जब ग्रीर अपनी टीम के साथ नई दिल्ली का दौरा करेंगे, तब आयात-निर्यात शुल्क, तकनीकी हस्तांतरण और बाजार पहुंच जैसे जटिल कानूनी पहलुओं पर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। इस प्रकार, भले ही तत्काल घोषणा टल गई हो, परंतु इस निरंतर वार्ता से स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका के बीच आने वाले दिनों में एक मील का पत्थर साबित होने वाली व्यापारिक डील होना तय है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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