विश्व धरोहर की दौड़ में भारत के 4 नए चमत्कार शामिल: अंडमान के रहस्यों से लेकर छत्तीसगढ़ के सिरपुर तक, जानें क्या है खास!
अंडमान के बाराटांग, नारकोंडम और बैरन द्वीप के साथ छत्तीसगढ़ के सिरपुर को भी सूची में जगह मिली है।

भारत के चार स्थलों को यूनेस्को की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इनमें अंडमान के बाराटांग, नारकोंडम और बैरन द्वीप के प्राकृतिक स्थल तथा छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक सिरपुर शामिल हैं।
भारत के सांस्कृतिक और प्राकृतिक वैभव के लिए एक बेहद अच्छी खबर सामने आई है। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के तीन प्रमुख प्राकृतिक क्षेत्रों—बाराटांग, नारकोंडम और बैरन द्वीप—तथा छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक स्थल सिरपुर को यूनेस्को (UNESCO) की अस्थायी विश्व धरोहर सूची (Tentative List) में शामिल कर लिया गया है। इन नए स्थलों के जुड़ने के साथ ही यूनेस्को की इस सूची में दर्ज भारतीय स्थलों की कुल संख्या अब बढ़कर 81 हो चुकी है।
सूची में स्थान पाने वाला पहला प्राकृतिक स्थल 'बाराटांग' है, जो अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है। यह स्थान अपनी अद्वितीय चूना पत्थर की गुफाओं और सक्रिय कीचड़ के ज्वालामुखी (Mud Volcanoes) के लिए जाना जाता है। यहाँ पाई जाने वाली चूना पत्थर की चट्टानों का निर्माण वर्षों के दौरान समुद्री जीवों के खोल, मूंगे और उनके अवशेषों के जमा होने से हुआ है। इस क्षेत्र का दुर्गम इलाका और ऊबड़-खाबड़ जमीन वैज्ञानिकों के शोध के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
दूसरा स्थल 'नारकोंडम और बैरन द्वीप' का समूह है, जो अंडमान द्वीपसमूह का हिस्सा है। ये द्वीप बर्मा-अंडमान-जावा ज्वालामुखीय क्षेत्र की आंतरिक श्रृंखला में चतुर्थ कल्प (Quaternary Period) के ज्वालामुखी हैं। मुख्य भूमि से अलग-थलग स्थित होने के कारण ये द्वीप ज्वालामुखीय गतिविधियों, उनके पारिस्थितिक प्रभावों और स्थानीय प्रजातियों के अध्ययन के लिए विशेष प्राकृतिक महत्व रखते हैं।
तीसरा स्थल छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित 'सिरपुर' है, जो एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक क्षेत्र है। यह ऐतिहासिक स्थान महानदी के पूर्वी तट पर बसा हुआ है और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 78 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतिहास के पन्नों में प्राचीन सिरपुर का बड़ा योगदान रहा है; इसे शरभपुरीय वंश के शासनकाल के दौरान कोसल राज्य की राजधानी के रूप में विकसित किया गया था। इसके बाद पांडुवंशी शासकों के दौर में भी इस शहर का व्यापक विकास और विस्तार हुआ।
यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना किसी भी स्थल के लिए स्थायी विश्व धरोहर बनने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम होता है। हालाँकि, यह अंतिम मान्यता नहीं है। भारत को अब इन सभी स्थलों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व के प्रमाण पत्र, संबंधित दस्तावेज और उनके संरक्षण की ठोस योजनाएं यूनेस्को के समक्ष प्रस्तुत करनी होंगी। इसके बाद ही यूनेस्को की निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन्हें अंतिम रूप से विश्व धरोहर का दर्जा देने पर विचार और फैसला किया जाएगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
