भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते पर संकट: स्टील सुरक्षा उपायों के विरोध में जवाबी कार्रवाई की तैयारी
ब्रिटेन के नए स्टील सुरक्षा उपायों और कार्बन टैक्स योजना के विरोध में भारत ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी, मुक्त व्यापार समझौता लागू होने में हो सकती है बड़ी देरी।

नई दिल्ली में भारत-ब्रिटेन आर्थिक बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधि। वार्ता का फोकस भारतीय स्टील पर ब्रिटेन की नई ड्यूटी और कार्बन टैक्स विवाद पर रहा।
नई दिल्ली: भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के धरातल पर उतरने से पहले एक बड़ा कूटनीतिक और व्यापारिक गतिरोध सामने आ गया है। ब्रिटेन द्वारा हाल ही में स्टील आयात पर लगाए गए कड़े सुरक्षा उपायों (सेफगार्ड मेजर्स) को वापस न लेने की स्थिति में भारत ने अब सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यदि ब्रिटेन अपने इस फैसले पर अड़ा रहता है, तो भारत द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के तहत ब्रिटिश निर्यात पर दी गई विभिन्न टैरिफ रियायतों पर नए सिरे से विचार करने के लिए विवश होगा। इस जवाबी कार्रवाई की जद में ब्रिटेन की सबसे प्रतिष्ठित निर्यात सामग्री, स्कॉच व्हिस्की और जिन भी आ सकते हैं। दोनों देशों के बीच उपजे इस ताजा तनाव के कारण अंतिम रूप पा चुके इस व्यापक आर्थिक समझौते के लागू होने में अनिश्चितकाल के लिए देरी होने की आशंका प्रबल हो गई है।
इस विवाद की जड़ें उस महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त से जुड़ी हैं जो ब्रिटेन ने बातचीत के दौरान हासिल की थी। भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) के अंतर्गत स्कॉच व्हिस्की के बाजार तक पहुंच बनाना ब्रिटिश पक्ष की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा था। इस समझौते के प्रावधानों के तहत भारत ने ब्रिटिश व्हिस्की और जिन पर लगने वाली भारी-भरकम 150 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी को तत्काल प्रभाव से घटाकर आधा, यानी 75 फीसदी करने पर सहमति व्यक्त की थी। इतना ही नहीं, एक सुनियोजित रोडमैप के तहत अगले 10 वर्षों की अवधि में इस टैरिफ को क्रमिक रूप से घटाकर महज 40 फीसदी के स्तर पर लाने का वादा भी किया गया था। ब्रिटिश उद्योग जगत के लिए यह रियायत भारतीय बाजार में अपनी पैठ मजबूत करने का एक अभूतपूर्व अवसर थी, लेकिन स्टील विवाद ने अब इस पूरी योजना पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।
इस जटिल व्यापारिक बाधा को दूर करने के लिए दोनों देशों के शीर्ष नीति-नियंता जल्द ही आमने-सामने होने वाले हैं। ब्रिटेन के व्यापार एवं व्यवसाय मंत्री पीटर काइल एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत के दौरे पर आ रहे हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य एजेंडा ब्रिटेन द्वारा स्टील सुरक्षा उपायों में की गई हालिया बढ़ोतरी और उसकी प्रस्तावित महत्वाकांक्षी योजना 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' (CBAM) पर भारत की आपत्तियों का निवारण करना होगा। भारतीय अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि ब्रिटेन के ये नए संरक्षणवादी नियम उस बाजार पहुंच (मार्केट एक्सेस) को पूरी तरह कमजोर कर देंगे, जिसे भारत ने लंबे समय की द्विपक्षीय वार्ताओं के बाद सुरक्षित किया था। तत्काल बातचीत मुख्य रूप से जून 2026 के बाद भी स्टील उत्पादों पर प्रतिबंध जारी रखने के ब्रिटिश फैसले पर केंद्रित रहेगी, जिसके तहत कम टैरिफ-फ्री कोटा और सीमा पार आयात पर अतिरिक्त पेनल्टी ड्यूटी लगाने का प्रावधान किया गया है।
कानूनी और तकनीकी धरातल पर भारतीय निर्यातकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन कड़े सुरक्षा उपायों से ब्रिटिश बाजार में उनके उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता समाप्त हो जाएगी। मई 2025 में दोनों देशों के बीच वार्ता संपन्न होने और जुलाई 2025 में इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद यह उम्मीद थी कि भारत के 99 फीसदी एक्सपोर्ट्स को ब्रिटेन में ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिलेगा। हालांकि, ब्रिटेन द्वारा घरेलू स्टील निर्माताओं को कम लागत वाले आयात से बचाने के तर्क ने इस पूरे समझौते के संतुलन को बिगाड़ दिया है। इसके अतिरिक्त, जनवरी 2027 से लागू होने वाले ब्रिटिश कार्बन बॉर्डर टैक्स को लेकर भी भारत ने कड़ी चेतावनी दी है। भारतीय वार्ताकारों ने पहले ही समझौते में ऐसे सुरक्षात्मक प्रावधान (रीटैलिएशन क्लॉज) शामिल करा लिए हैं, जो यह अधिकार देते हैं कि यदि ब्रिटेन का कोई भी नया टैक्स भारत को मिली रियायतों को शून्य करता है, तो भारत भी तत्काल जवाबी शुल्क लगा सकेगा। जब तक इन दोनों बड़े नीतिगत अवरोधों पर पूर्ण स्पष्टता और सहमति नहीं बनती, तब तक इस महाव्यापार समझौते का भविष्य अधर में लटका रहेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
