लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर होगी 816 ; जाने संसद में महिलाओं के लिए क्या है नया ?
भारतीय संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण की मंजूरी। लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 816 होंगी। जानें 2029 चुनावों से पहले होने वाले इस ऐतिहासिक बदलाव की पूरी जानकारी।

संसद के बाहर महिला सांसदों के साथ PM Modi का विजय मुद्रा में अभिवादन।
Women Reservation Bill India 2026 : भारत के संसदीय इतिहास में एक युगांतरकारी कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने नारी शक्ति को राजनीति की मुख्यधारा में लाने के लिए ऐतिहासिक संशोधनों को हरी झंडी दे दी है। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का मार्ग अब पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है, जिनमें से 273 सीटें विशेष रूप से महिला सांसदों के लिए आरक्षित होंगी। सरकार का यह रणनीतिक निर्णय साल 2023 के कानून को एक ठोस और व्यापक आधार प्रदान करता है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य वर्तमान जनप्रतिनिधियों को विस्थापित किए बिना महिला प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है।
इस बड़े संवैधानिक बदलाव का क्रियान्वयन 2029 के आम चुनाव से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। सीटों के विस्तार की यह प्रक्रिया परिसीमन की जटिलताओं को सुलझाने और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक अवसर को लोकतंत्र की मजबूती के लिए 'समय की मांग' बताते हुए सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होने का आह्वान किया है। आगामी 16 अप्रैल से शुरू होने वाले विशेष तीन दिवसीय सत्र में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा और अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है, जिसे लेकर राजधानी के सियासी गलियारों में भारी हलचल देखी जा रही है।
कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की बात करें तो सीटों की संख्या में यह भारी इजाफा उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच एक नई बहस को भी जन्म दे रहा है। दक्षिण भारत के कई क्षेत्रीय नेताओं ने जनसंख्या के आधार पर होने वाले इस विस्तार को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व उन राज्यों की तुलना में कम हो सकता है जिनकी जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। हालांकि, सरकार का पक्ष है कि यह विस्तार केवल आरक्षण लागू करने के लिए ही नहीं, बल्कि बढ़ती आबादी को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए भी आवश्यक है।
Reservation for women in legislative bodies is the need of the hour! This will make our democracy even more vibrant and participative. Any delay in bringing this reservation will be deeply unfortunate. Expressed my thoughts on the issue in this Op-Ed.https://t.co/vLbxa6iYli
— Narendra Modi (@narendramodi) April 9, 2026
यह विधेयक केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र को अधिक जीवंत और समावेशी बनाने की दिशा में एक साहसिक प्रयास है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीति-निर्धारण में संवेदनशीलता और संतुलित दृष्टिकोण आने की प्रबल संभावना है। यदि यह कानून धरातल पर उतरता है, तो भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो जाएगा जहां महिला शक्ति के पास कानून बनाने की सर्वोच्च शक्ति में इतनी बड़ी हिस्सेदारी होगी। इस आरक्षण को लागू करने में होने वाली किसी भी तरह की देरी अब केवल प्रशासनिक बाधा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रगति के मार्ग में एक बड़ा अवरोध मानी जाएगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
