भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर फैली 'फेक न्यूज़'! क्या सच में भारत आने वाला ईरानी तेल गया चीन?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने भुगतान संकट और जहाज के चीन मुड़ने के दावों को नकारा; 'ग्रीन सान्वी' टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर सुरक्षित भारत की ओर।

पश्चिम एशिया के अशांत माहौल और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर सरकार ने विराम लगा दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण ईरान से 6,00,000 बैरल कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा एक टैंकर बीच रास्ते से चीन की ओर मुड़ गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की तेल आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सुरक्षित है और ईरान से होने वाले आयात के भुगतान में किसी भी प्रकार की कोई रुकावट नहीं है।
मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, वैश्विक तेल व्यापार एक जटिल और गतिशील प्रक्रिया है जिसे अक्सर सामान्य समझ के अभाव में गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। शिपिंग दस्तावेजों या 'बिल ऑफ लैडिंग' में दर्ज गंतव्य पोर्ट केवल सांकेतिक होते हैं। परिचालन संबंधी लचीलेपन और कमर्शियल ऑप्टिमाइजेशन के आधार पर जहाज यात्रा के दौरान अपना मार्ग बदल सकते हैं, जिसका भुगतान विफलताओं से कोई संबंध नहीं होता। सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय रिफाइनर कंपनियां अपनी जरूरतों के अनुसार 40 से अधिक देशों से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं और वर्तमान में मध्य पूर्व से होने वाली आपूर्ति में कोई संकट नहीं है।
ऊर्जा आपूर्ति की सुदृढ़ता का प्रमाण देते हुए मंत्रालय ने एलपीजी आपूर्ति से जुड़े तथ्यों को भी सामने रखा। हाल ही में ईरान से आए जहाज 'सी बर्ड' ने मंगलौर पोर्ट पर सफलतापूर्वक गैस उतारी है। इसके अतिरिक्त, भारतीय ध्वज वाला टैंकर 'ग्रीन सान्वी' होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील मार्ग को सुरक्षित पार कर चुका है, जिसमें लगभग 44,000 टन एलपीजी लदी है। यह जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार इस चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्ग को पार करने वाला सातवां भारतीय पोत बन गया है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में 'ग्रीन आशा' और 'जग विक्रम' जैसे अन्य भारतीय टैंकर भी सुरक्षित रूप से भारत पहुंचेंगे। 44,000 टन एलपीजी की यह खेप भारत की लगभग आधे दिन की राष्ट्रीय खपत के बराबर है, जो देश की निरंतर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार ने नागरिकों और निवेशकों को आश्वस्त किया है कि आने वाले महीनों के लिए कच्चे तेल और एलपीजी की आवश्यकताएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी भ्रामक रिपोर्ट पर विश्वास न करें।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
