दिखावे की एकता या अंदरूनी कलह? INDIA ब्लॉक की बैठक में बाहर दिखी एकजुटता, लेकिन अंदर 5 बड़े मुद्दों पर उलझे सहयोगी दल|
विपक्षी इंडिया ब्लॉक की बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और अन्य मुद्दों को लेकर सहयोगी दलों के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं।

नई दिल्ली में आयोजित विपक्षी इंडिया ब्लॉक की बैठक के संदर्भ में विभिन्न दलों के नेताओं और पार्टी के प्रतीकों को दर्शाती फाइल तस्वीर।
नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक की बुधवार को हुई बैठक में ऊपरी तौर पर 19 पार्टियों ने हिस्सा लिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरी एकजुटता दिखाई गई। हालांकि, बैठक के अंदर की जो रिपोर्ट सामने आई है, उससे पता चलता है कि गठबंधन के भीतर कई अहम मुद्दों पर गंभीर मतभेद और वैचारिक दूरियां थीं। इस बैठक का मुख्य एजेंडा सीईसी ज्ञानेश कुमार का विरोध, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, चुनावों में धांधली और चुनाव आयोग के इस्तेमाल को लेकर एकजुट प्रदर्शन करना था, लेकिन अंदरखाने पांच बड़े मुद्दों पर सहयोगी दलों के सुर अलग-अलग नजर आए।
1. महाभियोग के प्रस्ताव पर असहमति
बैठक के दौरान सीपीआई (CPI) के प्रतिनिधि पी. संदोष कुमार ने सुझाव दिया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में महाभियोग का प्रस्ताव लाया जाना चाहिए। इसके लिए कुछ ऐसे विपक्षी दलों से भी समर्थन मांगा जाए जो आधिकारिक तौर पर 'इंडिया' ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं। हालांकि, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए सिरे से खारिज कर दिया कि इस तरह के राजनीतिक प्रयोग पहले भी विफल हो चुके हैं।
2. कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मांगें हुईं दरकिनार
इस महाबैठक से ठीक एक दिन पहले यानी मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक आयोजित हुई थी। इसमें एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कांग्रेस की इन प्रमुख मांगों को 'इंडिया' ब्लॉक के आधिकारिक एक्शन प्लान में जगह नहीं दी गई, जिससे पार्टी की अंदरूनी रणनीति पर सवाल खड़े हुए।
3. ईवीएम हटाने का कांग्रेस का एजेंडा दबा
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह पुराने बैलेट पेपर से चुनाव कराने का कड़ा मुद्दा उठाया था। मगर जब 'इंडिया' ब्लॉक का संयुक्त एक्शन प्लान तैयार किया गया, तो ईवीएम हटाने से जुड़ा यह मुख्य एजेंडा पूरी तरह गायब मिला।
4. सीजेपी (CJP) के मुद्दे पर कांग्रेस की चुप्पी
गठबंधन के कई घटक दल इस बात पर जोर दे रहे थे कि सीईसी को हटाने के इस अभियान में केवल राजनीतिक दलों तक सीमित न रहा जाए, बल्कि गैर-इंडिया ब्लॉक के विपक्षी दलों, एनजीओ और युवा संगठनों को भी जोड़ा जाए। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और एनसीपी (SCP) ने खुलकर यहां तक कह दिया कि वे सीईसी के खिलाफ इस मुहिम में सीजेपी (CJP) का समर्थन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लेकिन जैसे ही आंदोलन में सीजेपी को साथ लेकर चलने की बात उठी, कांग्रेस नेताओं ने इस पर पूरी तरह चुप्पी साध ली।
5. अकेले आंदोलन करने की शैली पर एतराज
शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार) ने मुंबई में सीजेपी के आंदोलन को सीधे तौर पर समर्थन देने का ऐलान किया। वहीं दूसरी ओर, गठबंधन के कई अन्य सहयोगी दलों ने इस प्रकार के स्वतंत्र रुख और 'अपनी डफली-अपना राग' अलापने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई। इन दलों का मानना है कि यदि इस मुहिम को जमीन पर असरदार बनाना है, तो सभी घटकों को आपसी तालमेल और एक साझे मंच के जरिए ही आगे बढ़ना होगा, अन्यथा आंदोलन की धार कमजोर पड़ जाएगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
