न्यूजीलैंड से ₹1.6 लाख करोड़ का निवेश; क्या भारत बनेगा नया ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब?
भारत-न्यूजीलैंड FTA: 20 अरब डॉलर के निवेश और 5000 नौकरियों से बाजार में आएगा बड़ा बदलाव। टेक्सटाइल और IT सेक्टर्स की चमकेगी किस्मत, पढ़ें निवेश की पूरी रिपोर्ट।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (दाएं) और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन (बाएं) नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय बैठक के दौरान चर्चा करते हुए।
India-New Zealand Free Trade Agreement 2026 : वैश्विक व्यापार के क्षितिज पर सोमवार का दिन भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों के लिए स्वर्णिम अध्याय बनकर उभरा है। दोनों देशों ने बहुप्रतीक्षित 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' (FTA) पर औपचारिक हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसे न्यूजीलैंड सरकार 'एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला सुनहरा अवसर' करार दे रही है। यह समझौता महज एक व्यापारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत के विनिर्माण और श्रम-निर्भर क्षेत्रों के लिए वैश्विक बाजार के द्वार खोलने वाली एक महागाथा है। इस ऐतिहासिक संधि के साथ ही भारत में न केवल न्यूजीलैंड से निवेश की बाढ़ आएगी, बल्कि हजारों युवाओं के लिए विदेशी धरती पर रोजगार के नए रास्ते भी साफ हो गए हैं।
समझौते की बारीकियों पर गौर करें तो न्यूजीलैंड ने अपने 95 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारतीय निर्यात के लिए शुल्क को लगभग समाप्त कर दिया है। इससे भारत के टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग जैसे श्रम-गहन उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा, जो अब तक औसतन 2.3 प्रतिशत टैरिफ के कारण प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे थे। अब ये उत्पाद 'जीरो ड्यूटी' के साथ न्यूजीलैंड के बाजारों में अपनी धाक जमा सकेंगे। आर्थिक मोर्चे पर न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की बड़ी घोषणा की है, जो भारत की विकास दर को नई गति प्रदान करेगा। इसके अलावा, आईटी, शिक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों के कुशल पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड ने 5,000 अस्थायी वीजा जारी करने का प्रावधान किया है, जिससे भारतीय प्रतिभाओं को तीन साल तक अंतरराष्ट्रीय अनुभव और उच्च वेतन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
कानूनी और कूटनीतिक दृष्टि से यह समझौता दोनों देशों के हितों का एक संतुलित मिश्रण है। जहाँ भारत ने भेड़ के मांस, कोयला और ऊन जैसे न्यूजीलैंड के उत्पादों के लिए अपनी 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायतें दी हैं, वहीं अपने घरेलू किसानों और लघु उद्योगों (MSME) की सुरक्षा का भी पूर्ण ध्यान रखा है। संवेदनशीलता को देखते हुए डेयरी उत्पाद, सब्जियां, चीनी और पशु उत्पादों को फिलहाल इस समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। साथ ही, शहद और किवीफ्रूट जैसे उत्पादों पर कोटा और न्यूनतम आयात मूल्य की व्यवस्था लागू रहेगी ताकि घरेलू बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अंततः, यह एफटीए प्रशांत क्षेत्र में भारत की आर्थिक पैठ को मजबूत करने के साथ-साथ दोनों देशों के साझा भविष्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक शक्तिशाली माध्यम सिद्ध होगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
