भारत-अफ्रीका ग्रीन एनर्जी मिशन: नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत का तकनीकी अनुभव बदलेगा अफ्रीका की तस्वीर। जानें कैसे यह साझेदारी बनेगी भविष्य का ग्लोबल मॉडल।

India-Africa Green Energy Mission 2026 : वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में एक नए युग का सूत्रपात हो रहा है, जहाँ भारत और अफ्रीका मिलकर 'स्वच्छ ऊर्जा' की एक नई इबादत लिखने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले एक दशक में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में जो चमत्कारिक प्रगति की है, वह अब अफ्रीकी महाद्वीप के अंधेरे को दूर करने के लिए एक वैश्विक ब्लूप्रिंट बन चुकी है। 130 गीगावाट से अधिक सौर और पवन ऊर्जा क्षमता जोड़कर भारत ने यह साबित कर दिया है कि विकासशील देश न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकते हैं, बल्कि दुनिया के लिए एक टिकाऊ मॉडल भी पेश कर सकते हैं। आज भारत की कुल बिजली क्षमता का लगभग आधा हिस्सा हरित स्रोतों से आ रहा है, जो अफ्रीका के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है।

अफ्रीका में ऊर्जा का परिवर्तन अब केवल कागजी नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वहां की व्यावहारिक आवश्यकता बन चुका है। वर्तमान में अफ्रीका के लगभग 60 करोड़ लोग बुनियादी बिजली से वंचित हैं, जो उनकी प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। भारत की प्रतिस्पर्धी बोली प्रणाली, पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया और विकेंद्रीकृत सौर मॉडल ने यह दिखाया है कि कैसे ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली पहुँचाई जा सकती है। इसी अनुभव का लाभ उठाकर अब अफ्रीकी देश डीजल जैसे महंगे और अस्थिर ईंधन पर अपनी निर्भरता खत्म कर अस्पतालों, स्कूलों और उद्योगों के लिए सौर और पवन ऊर्जा के विशाल भंडारों को बिजली में बदलने की कोशिशों में जुट गए हैं। यह केवल बिजली की आपूर्ति नहीं, बल्कि गरीबी के खिलाफ एक महा-अभियान है।

आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से अफ्रीका का यह 'ग्रीन मिशन' दुनिया के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। अफ्रीका को दुनिया के किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में सबसे अधिक सौर विकिरण प्राप्त होता है, जो इसे सौर ऊर्जा का स्वर्ग बनाता है। 2020 से 2025 के बीच यहाँ 25 गीगावाट हरित ऊर्जा जोड़ने का लक्ष्य है, जिसमें से 11 गीगावाट निजी क्षेत्र के माध्यम से सुनिश्चित भी की जा चुकी है। इसके अलावा, अफ्रीका के पास कोबाल्ट, तांबा और लिथियम जैसे उन महत्वपूर्ण खनिजों के विशाल भंडार हैं, जो भविष्य की बैटरी और विंड टर्बाइन बनाने के लिए अनिवार्य हैं। भारत के साथ यह सहयोग न केवल बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि वैश्विक क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन में अफ्रीका को एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।

भारत और अफ्रीका के बीच यह साझेदारी अब धरातल पर उतर चुकी है। 'पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' जैसी दिग्गज कंपनियां अफ्रीका 50 जैसे संस्थानों के साथ मिलकर ग्रिड आधुनिकीकरण और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत वित्तीय निवेश और सौर पंप जैसी योजनाओं के अपने अनुभव साझा करना जारी रखता है, तो यह गठबंधन एक आदर्श वैश्विक मॉडल बन जाएगा। अंततः, भारत-अफ्रीका का यह ग्रीन एनर्जी सहयोग न केवल आर्थिक विकास को नई गति देगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और टिकाऊ दुनिया का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story