IIT Bombay TB research : IIT बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन प्रकाशित किया है, जिसमें यह पता चला है कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस, जो क्षय रोग (टीबी) का कारण बनता है, एंटीबायोटिक दवाओं से खुद को बचाने के लिए अपनी बाहरी झिल्ली में बदलाव करता है। इस बदलाव से बैक्टीरिया लंबे समय तक जीवित रह सकता है और सुप्त अवस्था में दवाओं के प्रति अधिक सहनशील हो जाता है।

अध्ययन, जो केमिकल साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ, में पाया गया कि टीबी बैक्टीरिया की झिल्ली मुख्य रूप से लिपिड से बनी होती है, जो दवाओं के प्रवेश को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाती है। शोधकर्ताओं ने बैक्टीरिया को दो अवस्थाओं—सक्रिय और सुप्त—में पाला। जब बैक्टीरिया को चार प्रमुख टीबी दवाओं—रिफाबुटिन, मोक्सीफ्लॉक्सासिन, एमिकैसिन और क्लैरिथ्रोमाइसिन—के संपर्क में लाया गया, तो सुप्त अवस्था वाले बैक्टीरिया को रोकने के लिए दवाओं की मात्रा सक्रिय अवस्था की तुलना में 2 से 10 गुना अधिक आवश्यक पाई गई।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि यह बदलाव जेनेटिक म्यूटेशन के कारण नहीं, बल्कि बैक्टीरिया की झिल्ली में लिपिड संरचना के परिवर्तन के कारण होता है। शोधकर्ताओं ने 270 से अधिक लिपिड अणुओं की पहचान की, जो सक्रिय और सुप्त अवस्थाओं में स्पष्ट रूप से अलग थे। सक्रिय बैक्टीरिया की झिल्ली ढीली और तरल जैसी थी, जबकि सुप्त बैक्टीरिया की झिल्ली कठोर और सघन थी, जिससे दवाओं का प्रभाव न्यूनतम हो गया।

अध्ययन की प्रमुख लेखिका, प्रोफेसर शोभना कपूर ने बताया कि लिपिड बैक्टीरिया की रक्षा में पहली और सबसे मजबूत ढाल की तरह कार्य करते हैं। यदि इस कठोर झिल्ली को कमजोर किया जा सके, तो पुरानी दवाओं के प्रभाव को फिर से बढ़ाया जा सकता है और बैक्टीरिया स्थायी प्रतिरोध विकसित नहीं कर पाएगा।

यह रिसर्च टीबी के उपचार में नई रणनीतियों के लिए मार्ग प्रशस्त करती है और भविष्य में दवाओं के प्रति सुप्त बैक्टीरिया की संवेदनशीलता बढ़ाकर रोग नियंत्रण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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