भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों एक अनोखे नाम वाले संगठन ने तहलका मचा रखा है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम से उभरे इस नए मोर्चे ने महज कुछ ही दिनों के भीतर डिजिटल दुनिया में करोड़ों युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया है। इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर चंद दिनों में करीब डेढ़ करोड़ फॉलोअर्स बटोरने वाले इस संगठन ने मुख्यधारा के बड़े राजनीतिक दलों को भी हैरान कर दिया है। युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे इस नाम ने देश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या भारत में कोई भी व्यक्ति या संगठन अपनी राजनीतिक पार्टी का गठन कर सकता है। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी नए दल की स्थापना, उसके नामकरण और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मान्यता दिए जाने की एक बेहद स्पष्ट और जटिल कानूनी प्रक्रिया निर्धारित है, जिसे समझना किसी भी नागरिक और विशेषकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आवश्यक है।

इस डिजिटल आंदोलन या राजनीतिक दल के जन्म की कहानी बेहद दिलचस्प है जो न्यायपालिका की एक टिप्पणी से जुड़ी हुई है। दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम भारत के उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ वकील का दर्जा दिए जाने से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान शुरू हुआ। सुनवाई के दौरान देश के शीर्ष न्यायधीश ने समाज और व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए 'कॉकरोच' शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा था कि रोजगार न मिल पाने या पेशे में जगह न बना पाने के कारण कुछ युवा व्यवस्था पर हमला करने लगते हैं और परजीवियों की तरह सोशल मीडिया, आरटीआई या अन्य एक्टिविज्म के माध्यम से हर जगह फैल जाते हैं। हालांकि बाद में शीर्ष अदालत की तरफ से इस बयान पर स्पष्टीकरण भी आया कि उनकी बात को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर विरोध का एक नया तरीका जन्म ले चुका था। तीस वर्षीय युवा अभिजीत दीपके ने इस टिप्पणी को युवाओं की अभिव्यक्ति की आजादी पर चोट मानते हुए इसके विरोध स्वरूप प्रतीकात्मक रूप से 'कॉकरोच जनता पार्टी' की नींव रख दी।

डिजिटल स्पेस में मचे इस घमासान के बीच यह कानूनी सवाल सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है कि कोई भी दल कागजों पर या वास्तविक धरातल पर एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी कैसे बनता है। भारत सरकार और निर्वाचन आयोग के वैधानिक प्रावधानों के अनुसार, देश में किसी भी राजनीतिक दल का आधिकारिक पंजीकरण 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A' के तहत किया जाता है। कोई भी व्यक्ति केवल सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर खुद को पंजीकृत राजनीतिक दल घोषित नहीं कर सकता। चुनाव आयोग के कड़े नियमों के मुताबिक, एक नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने के लिए प्राथमिक तौर पर कम से कम एक सौ सदस्यों का होना अनिवार्य है। ये सभी एक सौ सदस्य भारत के वैध नागरिक होने चाहिए और उनके पास वैध मतदाता पहचान पत्र होना आवश्यक है। इसके साथ ही इन सभी सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से यह हलफनामा यानी शपथ पत्र देना होता है कि वे देश के किसी अन्य पंजीकृत राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं।

पंजीकरण की इस कानूनी यात्रा में समय सीमा का विशेष महत्व है। पार्टी के गठन के ठीक तीस दिनों के भीतर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग को निर्धारित प्रारूप में आवेदन भेजना होता है। यदि तीस दिनों की यह समय सीमा समाप्त हो जाती है, तो वह आवेदन स्वतः ही अमान्य घोषित कर दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, दल के नामकरण को लेकर भी कड़े नियम लागू हैं। कोई भी नया संगठन किसी ऐसे नाम का चयन नहीं कर सकता जो देश में पहले से मौजूद किसी पंजीकृत दल के नाम से मिलता-जुलता हो या उसका अनुवाद हो, ताकि आम मतदाताओं के बीच किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

आवेदन के साथ संगठन को अपने नियमों, उपनियमों और सिद्धांतों की एक स्पष्ट प्रतिलिपि आयोग को सौंपनी होती है। इस प्रतिलिपि में धारा 29A के तहत एक अनिवार्य घोषणा शामिल होती है, जिसके अनुसार पार्टी को भारतीय संविधान, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रति सच्ची निष्ठा रखने तथा देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लेना होता है। इसके साथ ही आंतरिक लोकतंत्र क्लॉज के तहत हर चार साल में संगठन के भीतर आंतरिक चुनाव कराने की व्यवस्था भी जरूरी है। वित्तीय नियमों के तहत आवेदन के साथ दस हजार रुपये का नॉन-रिफंडेबल डिमांड ड्राफ्ट, पार्टी कार्यालय के पते से जुड़ा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC), पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण और पार्टी के मुख्य तीन पदाधिकारियों के पिछले तीन वर्षों के आयकर रिटर्न (ITR) की कॉपियां जमा करनी पड़ती हैं।

निर्वाचन सदन द्वारा इन सभी दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच के बाद आवेदक को दो राष्ट्रीय और दो स्थानीय समाचार पत्रों में एक सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कराना होता है। इस नोटिस के माध्यम से देश के नागरिकों से उस पार्टी के गठन को लेकर आपत्तियां मांगी जाती हैं। यदि तय समय में कोई वैध आपत्ति दर्ज कराई जाती है, तो चुनाव आयोग के समक्ष उसकी बाकायदा कानूनी सुनवाई होती है। सभी प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पार करने के बाद ही आयोग दल को पंजीकृत करता है। हालांकि, पंजीकरण मिलने के बाद भी राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा पाना एक अलग चुनौती होती है, जिसके लिए चुनावों में न्यूनतम छह प्रतिशत वोट शेयर और निर्धारित संख्या में लोकसभा या विधानसभा सीटें जीतना आवश्यक होता है। डिजिटल स्पेस में युवाओं का ध्यान खींचने वाली इस परिघटना ने देश की कानूनी और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बुनियादी नियमों को एक बार फिर विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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