ग्रेटर नोएडा में अधूरी सड़क का शिकार बने अस्पताल मैनेजर, गड्ढे में गिरने से हुई मौत
दनकौर इलाके में अधूरे सड़क निर्माण और सुरक्षा संकेतों के अभाव के कारण बाइक सवार मैनेजर की पूरी रात गड्ढे में पड़े रहने से मौत हो गई।

दनकौर क्षेत्र में अधूरी सड़क के गहरे गड्ढे में दुर्घटनाग्रस्त हुई बाइक, जिसमें सवार अस्पताल मैनेजर की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में सड़क सुरक्षा के दावों की एक और दुखद तस्वीर सामने आई है। दनकौर इलाके में सड़क निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही के कारण एक आई केयर अस्पताल के मैनेजर की असमय मृत्यु हो गई। फरीदाबाद के एनआईटी-1 निवासी 45 वर्षीय अतुल कुमार जोशी रविवार देर रात अपनी बाइक से ग्रेटर नोएडा की ओर जा रहे थे। मंझावली पुल के पास अंधेरे में अचानक सड़क समाप्त होने और एक गहरे गड्ढे के कारण उनकी बाइक अनियंत्रित होकर नीचे जा गिरी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, सहायता न मिलने के कारण वे पूरी रात गड्ढे में ही पड़े रहे।
सोमवार की सुबह राहगीरों द्वारा घटना की सूचना दिए जाने के बाद दनकौर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने गंभीर रूप से घायल अवस्था में अतुल को बाहर निकाला और उन्हें ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हेलमेट के शीशे के कारण उनकी नाक पर गहरी चोट आई थी, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगा था और न ही सुरक्षा के लिए बैरिकेड्स की व्यवस्था थी, जिससे अंधेरे में रास्ता न दिख पाना इस हादसे का मुख्य कारण बना।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर परिजनों को सौंप दिया है। कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार के अनुसार, फिलहाल परिवार की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। यह घटना एक बार फिर सड़क निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। गौरतलब है कि इसी वर्ष जनवरी में इंजीनियर युवराज मेहता की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश भर में खतरनाक स्थानों को चिह्नित कर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर लापरवाही की घटनाएं प्रशासन के दावों की पोल खोल रही हैं। सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को रोकने के लिए अब ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

Lalita Rajput
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