होर्मुज संकट: ट्रंप ने चीन और सहयोगियों पर बनाया दबाव, कहा- "अगर मदद नहीं की, तो हम याद रखेंगे"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए 7 देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है। जानें किन देशों को मिली चेतावनी और वैश्विक तेल बाजार पर इसका क्या होगा असर।

Trump pressures China and allies
विशेष अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट: होर्मुज जलडमरूमध्य और ट्रंप की नई रणनीति
वॉशिंगटन/काहिरा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। रविवार (अमेरिकी समयानुसार) को एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने खुलासा किया कि उनकी सरकार ने दुनिया के लगभग सात देशों से संपर्क किया है। उन्होंने इन देशों से मांग की है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अपने युद्धपोत तैनात करें ताकि तेल के वैश्विक व्यापार मार्ग को खुला और सुरक्षित रखा जा सके।
"यह आपका इलाका है, इसकी रक्षा करें" – ट्रंप
ट्रंप ने उन देशों को आड़े हाथों लिया जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस जलमार्ग पर पूरी तरह निर्भर हैं, लेकिन इसकी सुरक्षा का बोझ अकेले अमेरिका पर छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा, "मैं इन देशों से मांग कर रहा हूं कि वे आएं और अपने क्षेत्र की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका अपना क्षेत्र है। यह वह जगह है जहां से उन्हें अपनी ऊर्जा मिलती है। अमेरिका को इसकी उतनी जरूरत नहीं है क्योंकि हमारे पास अपना तेल भंडार है।"
राष्ट्रपति ने विशेष रूप से चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल इसी जलमार्ग से प्राप्त करता है, जबकि अमेरिका के लिए यह हिस्सा मात्र 1% के करीब है।
किन देशों से की गई है अपील?
हालांकि ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर सातों देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन उनके बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि इस सूची में चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और संभवतः कुछ नाटो (NATO) सहयोगी शामिल हैं। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि ये देश मदद के लिए आगे नहीं आते हैं, तो अमेरिका इसे याद रखेगा। उन्होंने कहा, "चाहे हमें समर्थन मिले या न मिले, मैं उनसे कह चुका हूं: हम याद रखेंगे (We will remember)।"
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और वर्तमान संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल तेल निर्यात का लगभग 20% (यानी पांचवां हिस्सा) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इस रास्ते को बाधित करने की धमकियों और हालिया हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अमेरिका में गैस की कीमतों में भी पिछले दो हफ्तों में भारी उछाल देखा गया है।
सहयोगियों की प्रतिक्रिया: सावधानी और चुप्पी
ट्रंप की इस मांग पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया अब तक ठंडी रही है:
- जापान और ऑस्ट्रेलिया: दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि उनकी फिलहाल युद्धपोत भेजने की कोई योजना नहीं है। जापानी रक्षा मंत्री ने संसद में कहा कि यह कानूनी रूप से जटिल मामला है।
- ब्रिटेन: प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ट्रंप से बातचीत तो की है, लेकिन युद्धपोतों को सीधे युद्ध क्षेत्र में भेजने पर अभी कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है।
- फ्रांस: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मिशन की संभावना पर बात की है, लेकिन उन्होंने शर्त रखी है कि यह केवल तभी संभव है जब युद्ध की तीव्रता कम हो।
ईरान का रुख
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि कुछ देशों ने सुरक्षित मार्ग के लिए उनसे संपर्क किया है, लेकिन यह ईरान की सेना तय करेगी कि किसे गुजरने देना है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह जलमार्ग अमेरिका और उसके सहयोगियों को छोड़कर बाकी सभी के लिए खुला है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम अमेरिका की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का विस्तार माना जा रहा है। वे चाहते हैं कि वैश्विक सुरक्षा का खर्च वह देश उठाएं जो उसके सबसे बड़े लाभार्थी हैं। अब देखना यह होगा कि क्या ये 7 देश ट्रंप की चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं या वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट और गहराएगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
