आखिरकार दुनिया को मिली राहत! अमेरिका-ईरान में युद्ध खत्म, जाने शांति समझौते में तेहरान ने मनवाईं कौन-सी शर्तें?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए ऐतिहासिक समझौता हुआ है। ईरान ने इसे अपनी जीत बताते हुए होर्मुज पर नियंत्रण और अरबों डॉलर मिलने का दावा किया है।

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद ईरानी अधिकारी मीडिया के समक्ष बयान देते हुए। समझौते में कई प्रतिबंधों को हटाने की बात कही गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य तनाव और युद्ध को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसने पूरे मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति को बदलकर रख दिया है। इस शांति समझौते की घोषणा के बाद से ही वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। रविवार शाम को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रस्ताव के तहत दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने से संबंधित 'मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (MoU) के मसौदे को अंतिम रूप दिया गया। इस घटनाक्रम को तेहरान अपनी एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहा है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ईरान ने इस समझौते के माध्यम से अमेरिका और इजरायल पर अपनी श्रेष्ठता स्थापित कर ली है तथा अमेरिका को इस समझौते के लिए विवश होना पड़ा है।
इस समझौते के संदर्भ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सहमति जताते हुए सभी को बधाई दी है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की आधिकारिक मंजूरी देने की बात भी कही है। वहीं, ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी इस बहुप्रतीक्षित समझौते की पुष्टि कर दी है। हालांकि, अंतिम और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने से पहले ही ईरानी मीडिया ने इस समझौते के तहत अपने देश को मिलने वाली कई बड़ी सहूलियतों का दावा किया है। इन दावों के अनुसार, समझौते में ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब्त की गई ईरान की संपत्ति (फ्रीज एसेट्स) का एक बड़ा हिस्सा तुरंत जारी किया जाएगा, जिसे भविष्य में और बढ़ाया जाएगा।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस मसौदे में ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का एक विशाल मुआवजा फंड बनाने की बात शामिल है, जो युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए होगा। इसके अतिरिक्त, होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) का पूर्ण प्रबंधन अब ईरान के हाथों में होगा और भविष्य में वह वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क भी वसूल सकेगा। वित्तीय संसाधनों तक ईरान की पूरी पहुंच बहाल करने का दावा भी किया गया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि 60 दिनों की आगामी बातचीत के दौरान ईरान के 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे, जिसमें से 12 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि शुक्रवार को होने वाली अंतिम बातचीत से ठीक पहले तेहरान को हस्तांतरित कर दी जाएगी। परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी यह दावा किया गया है कि एनरिच्ड यूरेनियम और ईरान की सभी परमाणु सुविधाएं देश के भीतर ही सुरक्षित रहेंगी।
सैन्य मोर्चे पर भी इस समझौते के व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। समझौते के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम की घोषणा कर दी गई है। यह भी तय हुआ है कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के इलाकों से पूरी तरह पीछे हटेगी। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिवालय ने यह स्पष्ट किया है कि लेबनान समेत सभी संघर्ष वाले क्षेत्रों में सैन्य अभियान तत्काल प्रभाव से और स्थायी रूप से रोक दिए जाएंगे। इसके अलावा, ईरान के खिलाफ की गई नौसैनिक नाकेबंदी को भी पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।
इस पूरे शांति प्रयास में पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जिसके लिए ईरान ने आधिकारिक रूप से इस्लामाबाद का आभार भी व्यक्त किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार तड़के दुनिया को सबसे पहले इस ईरान-अमेरिका समझौते की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमति जताई है, जिससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में पसरा तनाव काफी हद तक कम हो जाएगा। इस समझौते पर औपचारिक रूप से 19 जून, शुक्रवार को हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, अंतिम समझौते के लिए वृहद बातचीत तब तक के लिए टाल दी गई है, जब तक कि दोनों पक्ष वर्तमान MoU के तहत अपनी प्रारंभिक प्रतिबद्धताओं को पूरी ईमानदारी से लागू नहीं कर देते। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के दावों में अभी अंतर है, और समझौते का अंतिम आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
