NDA बैठक में प्रधानमंत्री ने ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द के ऐतिहासिक संदर्भ और पूर्ववर्ती आर्थिक नीतियों को लेकर टिप्पणी की।

नई दिल्ली में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की विशेष बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आर्थिक विकास यात्रा और पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए एक बार फिर ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया। देश के सबसे लंबे निरंतर कार्यकाल वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के अवसर पर आयोजित इस बैठक में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि धीमी आर्थिक विकास दर को ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ जैसा नाम देकर उसकी जिम्मेदारी देश की बहुसंख्यक आबादी पर डालने का प्रयास किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि लंबे समय तक देश को यह विश्वास दिलाया गया कि भारत में तेज आर्थिक विकास संभव नहीं है और विकास की धीमी गति को सामान्य मान लिया गया था। उन्होंने कहा कि उस दौर की नीतिगत विफलताओं और प्रशासनिक कमियों को एक ऐसे शब्द से जोड़ा गया, जिसका संबंध देश की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा गया। प्रधानमंत्री ने इसे कांग्रेस सरकारों की आर्थिक सोच और कार्यशैली से जोड़ते हुए कहा कि उस दौर की विकास दर को ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ कहा जाना अधिक उपयुक्त होता।

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यह शब्द भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास से जुड़ा हुआ है और दशकों से आर्थिक एवं राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा है। अर्थशास्त्री राज कृष्ण ने वर्ष 1978 में पहली बार ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ शब्द का प्रयोग किया था। उस समय वह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से जुड़े हुए थे और भारत की आर्थिक वृद्धि दर का विश्लेषण कर रहे थे।

आर्थिक इतिहास के अनुसार स्वतंत्रता के बाद लगभग 1950 से 1980 के दशक तक भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर औसतन 3.5 से 4 प्रतिशत के आसपास रही। इसी धीमी लेकिन स्थिर विकास दर को संदर्भित करने के लिए राज कृष्ण ने ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उनका उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय की आलोचना करना नहीं था, बल्कि उस दौर की आर्थिक नीतियों और विकास की सीमित गति की ओर ध्यान आकर्षित करना था।

हालांकि समय के साथ यह शब्द विवादों का विषय बन गया। कई अर्थशास्त्रियों और राजनीतिक विश्लेषकों ने तर्क दिया कि किसी आर्थिक प्रवृत्ति को धार्मिक पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। आलोचकों का मानना रहा कि यह शब्द भारत की आर्थिक चुनौतियों को सांस्कृतिक संदर्भ में प्रस्तुत करता है, जबकि समर्थकों का कहना था कि यह केवल एक रूपक था जिसका उद्देश्य आर्थिक प्रदर्शन की वास्तविक स्थिति को दर्शाना था।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि NDA सरकारों के कार्यकाल में भारत ने विकास की नई गति देखी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में देश ने तेज विकास की संभावनाओं को महसूस किया। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 के बाद नीति, नीयत और निर्णय क्षमता के संयोजन से देश की आर्थिक गति को नई दिशा मिली है।

बैठक में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस सरकारों पर विभिन्न आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में देश कई बड़े घोटालों और नीतिगत बाधाओं से प्रभावित रहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश और विकास परियोजनाओं के माध्यम से भारत की आर्थिक क्षमता को मजबूत करने का प्रयास किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द केवल एक आर्थिक अवधारणा नहीं बल्कि भारत की विकास यात्रा से जुड़ा एक ऐतिहासिक संदर्भ भी है। यह उस दौर को दर्शाता है जब देश नियोजित अर्थव्यवस्था, लाइसेंस-परमिट व्यवस्था और सीमित निजी निवेश जैसी चुनौतियों से गुजर रहा था। बाद के दशकों में आर्थिक उदारीकरण और नीतिगत सुधारों ने विकास दर को नई गति प्रदान की।

प्रधानमंत्री मोदी के हालिया बयान के बाद यह विषय एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया है। आर्थिक इतिहास, राजनीतिक दृष्टिकोण और विकास मॉडल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह बहस केवल एक शब्द तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की आर्थिक यात्रा, नीतिगत बदलावों और विकास के विभिन्न चरणों को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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