Rajasthan High Court हल्दीघाटी पर हुआ सख्त; अतिक्रमण पर पूरी तरह रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने हल्दीघाटी और रक्त तलाई में अतिक्रमण और गंदगी पर कड़ा संज्ञान लिया। कोर्ट ने ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, सुरक्षा और अवैध निर्माण पर प्रतिबंध के आदेश जारी किए हैं। 15 दिनों में सफाई अभियान और 24 घंटे सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास के प्रतीक हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई के संरक्षण को लेकर कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने ऐतिहासिक स्थलों के “पिकनिक स्पॉट” में तब्दील होने पर गहरी चिंता जताई और प्रशासनिक उदासीनता को कर्तव्य की उपेक्षा करार दिया। हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप इतिहास और धरोहरों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हल्दीघाटी और रक्त तलाई की वर्तमान स्थिति :
हाईकोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि जिस हल्दीघाटी की माटी शौर्य की गाथा कहती है, वह अब अतिक्रमण, शराब की बोतलों और गंदगी की भेंट चढ़ चुकी है। याचिका में उजागर किया गया कि रक्त तलाई, जहाँ महाराणा प्रताप और उनकी सेना के योद्धाओं का बलिदान हुआ था, आज दिन में प्रेमियों की शरणस्थली और रात में नशेड़ियों का अड्डा बन गया है।
अतिक्रमण, सीवेज और सड़क चौड़ीकरण पर कोर्ट के सवाल :
हाईकोर्ट ने कहा कि खुले सीवेज, अवैध निर्माण और पहाड़ियों का समतलीकरण संविधान के अनुच्छेद 21 और 49 का उल्लंघन है। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि 2024 के बजट में घोषित ‘महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट’ योजना केवल कागजों तक क्यों सीमित है।
हाईकोर्ट के अंतरिम निर्देश :
कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
- कोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी नए निर्माण या विस्तार पर प्रतिबंध।
- 15 दिनों में कचरा, खरपतवार और गंदगी हटाने के लिए विशेष अभियान।
- स्थलों पर 24 घंटे सुरक्षा और कार्यवाहक नियुक्त करना।
- ऐतिहासिक ढलानों पर पार्किंग प्रतिबंध।
- गंदगी फैलाने वालों पर भारी जुर्माना।
प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई :
हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय पुरातत्व विभाग (ASI) को नोटिस जारी किया। अधिवक्ता निखिल भंडारी ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि धरोहरों की रक्षा के लिए अवैध अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
1576 में महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच हुआ हल्दीघाटी का युद्ध भारतीय इतिहास का निर्णायक अध्याय है। रक्त तलाई वह स्थल है जहाँ बलिदान की पराकाष्ठा हुई थी। हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद है कि इन स्थलों का खोया हुआ गौरव पुनः बहाल होगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
