नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के सफेद गलियारे आज एक ऐसी खामोशी के गवाह बन रहे हैं, जिसमें दर्द भी है और एक लंबी जद्दोजहद का अंत भी। हम बात कर रहे हैं हरीश राणा की, जो पिछले कई समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और अब अपने जीवन के उस मोड़ पर हैं, जहाँ चिकित्सा विज्ञान की सीमाएं खत्म होती दिख रही हैं और केवल दुआओं का सहारा बचा है।

एम्स के आईसीयू (ICU) वार्ड में भर्ती हरीश राणा की स्थिति इस समय बेहद नाजुक बनी हुई है। उनके परिवार, चाहने वाले और वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मी सबकी आंखों में एक ही सवाल है कि आखिर एक संघर्षशील जीवन का समापन कैसा होता है?

अस्पताल के भीतर का माहौल

एम्स के विशेष वार्ड में जहाँ हरीश राणा को रखा गया है, वहाँ मशीनों की बीप और वेंटिलेटर की गूँज के अलावा केवल सन्नाटा है। डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे उनकी निगरानी कर रही है। हालांकि, उनके शरीर ने दवाओं पर प्रतिक्रिया देना काफी कम कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि जब कोई मरीज 'मल्टी-ऑर्गन फेलियर' या लाइलाज स्थिति की अंतिम अवस्था में होता है, तो प्राथमिकता इलाज से हटकर 'पेलिएटिव केयर' (Palliative Care) यानी मरीज को कम से कम दर्द देने पर आ जाती है।

हरीश के पास मौजूद नर्सों और वार्ड स्टाफ का कहना है कि उनकी आँखों में अब भी एक अजीब सी चमक है, जैसे वह कुछ कहना चाहते हों, लेकिन शब्द उनका साथ नहीं दे रहे। उनके हाथ कभी-कभी हवा में हिलते हैं, मानो वह अपने अपनों को अंतिम विदाई दे रहे हों।

परिवार का अटूट धैर्य

हरीश राणा के परिवार के सदस्य अस्पताल के बाहर रैन बसेरे और प्रतीक्षालय में दिन-रात काट रहे हैं। उनकी पत्नी और बच्चों के चेहरे पर थकान और अनिश्चितता साफ देखी जा सकती है। उनके लिए यह केवल एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि उनके घर के उस स्तंभ का गिरना है जिसने उन्हें हमेशा छाया दी।

परिवार का कहना है कि हरीश हमेशा से एक लड़ाकू व्यक्ति रहे हैं। उन्होंने जीवन की हर मुश्किल का सामना मुस्कुराहट के साथ किया। आज जब वह मौत के करीब खड़े हैं, तब भी परिवार को उम्मीद है कि शायद कोई चमत्कार हो जाए। एम्स के काउंसलर्स परिवार को मानसिक रूप से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे इस कठिन सत्य को स्वीकार कर सकें।

चिकित्सा विज्ञान की अपनी सीमाएं

एम्स के वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुसार, हरीश राणा के अंतिम दिनों को आरामदायक बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जब दवाएं काम करना बंद कर देती हैं, तो 'एंड ऑफ लाइफ केयर' (End of Life Care) शुरू की जाती है। इसमें मुख्य रूप से:

  • दर्द प्रबंधन: उन्हें ऐसी दवाएं दी जा रही हैं जिससे उन्हें शारीरिक पीड़ा का अहसास न हो।
  • सम्मानजनक विदाई: अस्पताल यह सुनिश्चित कर रहा है कि उनके अंतिम क्षणों में उनकी निजता और गरिमा बनी रहे।
  • भावनात्मक जुड़ाव: परिवार को सीमित समय के लिए उनके पास जाने की अनुमति दी जा रही है ताकि वे अपनी अंतिम बातें साझा कर सकें।

समाज और चाहने वालों की दुआएं

जैसे-जैसे हरीश राणा की स्थिति की खबरें बाहर आ रही हैं, सोशल मीडिया और उनके पैतृक गांव में लोग उनके लिए प्रार्थनाएं कर रहे हैं। हरीश केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के कई लोगों के लिए प्रेरणा थे। उनके अंतिम दिनों की खबरें सुनकर कई पुराने मित्र और परिचित उन्हें एक नजर देखने एम्स पहुँच रहे हैं, हालांकि सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों से हर किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं है।

एक कठिन विदाई की तैयारी

एम्स के गलियारों में सन्नाटा गहराता जा रहा है। शाम की ढलती रोशनी के साथ हरीश राणा के जीवन का सूरज भी धीरे-धीरे अस्त होने की ओर है। यह समय केवल चिकित्सा बुलेटिन का नहीं, बल्कि एक इंसान के उस सफर को याद करने का है जो उसने पूरी ईमानदारी और मेहनत से जिया। अस्पताल के कर्मचारी भी भावुक हैं, क्योंकि उन्होंने हरीश को हफ्तों तक लड़ते देखा है।

अंतिम दिनों का यह समय हमें यह सिखाता है कि जीवन कितना अनिश्चित है, लेकिन एक गौरवपूर्ण संघर्ष हमेशा याद रखा जाता है। हरीश राणा के अंतिम पल एम्स की मशीनों के बीच नहीं, बल्कि उन हजारों दिलों में बीत रहे हैं जहाँ उन्होंने अपनी जगह बनाई थी।


हरीश राणा की कहानी केवल एक बीमारी की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसानी हौसले और अंत में नियति के सामने आत्मसमर्पण की एक मानवीय दास्तां है। एम्स प्रशासन अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है कि हरीश को कम से कम तकलीफ हो और उनका सफर शांतिपूर्ण रहे।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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