दिल्ली के दरियागंज में जूस बेचने वाले गुलशन कुमार ने कैसे खड़ा किया टी-सीरीज का साम्राज्य और 'आशिकी' फिल्म से कैसे रातों-रात बदली उनकी किस्मत।

भारतीय संगीत जगत के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो समय की सीमाओं को लांघकर अमर हो जाते हैं। उन्हीं में से एक नाम है गुलशन कुमार दुआ का। दिल्ली की गलियों से निकलकर मुंबई के मायानगरी में टी-सीरीज जैसा विशाल साम्राज्य खड़ा करने वाले गुलशन कुमार की जीवन यात्रा किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे इस व्यक्ति ने न केवल अपनी किस्मत बदली, बल्कि भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री की पूरी दिशा और दशा ही बदल दी। उनके दूरदर्शी विजन ने संगीत को ऊंचे रईसों के महलों से निकालकर आम आदमी की जेब तक पहुंचा दिया।

गुलशन कुमार का जन्म दिल्ली के एक साधारण पंजाबी अरोड़ा परिवार में हुआ था। उनके पिता दिल्ली के दरियागंज इलाके में फलों के जूस की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। शुरुआती दिनों में गुलशन भी अपने पिता के साथ इसी दुकान पर हाथ बंटाते थे। हालांकि, उनकी आंखों में कुछ बड़ा करने का जुनून था। संगीत के प्रति उनके लगाव और बाजार की नब्ज पहचानने की कला ने उन्हें जल्द ही इस छोटे से व्यवसाय से बाहर निकाल दिया। उन्होंने महसूस किया कि उस दौर में संगीत की कैसेट्स बेहद महंगी थीं और आम लोगों की पहुंच से बाहर थीं। इसी कमी को उन्होंने अवसर में बदला और सस्ते दामों पर गानों को रिकॉर्ड कर बेचने का छोटा सा काम शुरू किया।

यहीं से 'सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड' यानी टी-सीरीज की नींव पड़ी। गुलशन कुमार ने संगीत प्रेमियों को सस्ता और सुलभ विकल्प प्रदान किया, जिसने देखते ही देखते बाजार में तहलका मचा दिया। उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साल 1990 में आया, जब फिल्म 'आशिकी' रिलीज हुई। इस फिल्म के गानों ने लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। राहुल रॉय और अनु अग्रवाल अभिनीत इस फिल्म के संगीत ने टी-सीरीज को रातों-रात भारत का सबसे बड़ा म्यूजिक ब्रांड बना दिया। इस सफलता ने न केवल गुलशन कुमार को स्थापित किया, बल्कि कुमार सानू और अनुराधा पौडवाल जैसे गायकों को भी सुपरस्टार बना दिया।

गुलशन कुमार की खासियत केवल एक सफल बिजनेसमैन होना नहीं थी, बल्कि वे नए टैलेंट के पारखी भी थे। उन्होंने सोनू निगम जैसे अनगिनत कलाकारों को मंच दिया और उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। संगीत के साथ-साथ उनकी धार्मिक आस्था भी अटूट थी। वे माता वैष्णो देवी और भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। वैष्णो देवी में उनके द्वारा स्थापित किया गया 'भंडारा' आज भी लाखों श्रद्धालुओं को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराता है। वे अपनी सादगी और दान-पुण्य के लिए भी जाने जाते थे, जिससे उन्होंने करोड़ों दिलों में अपनी जगह बनाई।

हालांकि, सफलता के इस शिखर पर पहुंचे गुलशन कुमार की जीवन यात्रा का अंत अत्यंत दुखद रहा। 12 अगस्त 1997 को मुंबई के एक मंदिर के बाहर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे देश और फिल्म जगत को झकझोर कर रख दिया। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन टी-सीरीज के रूप में उनका लगाया हुआ पौधा आज एक वटवृक्ष बन चुका है, जो दुनिया के सबसे बड़े यूट्यूब चैनलों में से एक है। गुलशन कुमार की विरासत आज भी हर उस भारतीय घर में गूंजती है, जहां संगीत की सुरीली धुनें सुनाई देती हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story