अदन की खाड़ी में भारत आ रहे एक बल्क कैरियर जहाज पर समुद्री लुटेरों द्वारा किए गए हमले की एक बड़ी और सनसनीखेज घटना सामने आई है। यह खतरनाक घटना 1 जुलाई के दिन घटी, जब ‘गोल्डन आर्सेनल’ नामक जहाज अदन की खाड़ी से गुजरते हुए भारत की तरफ आ रहा था। इसी दौरान अचानक हथियारों से लैस समुद्री लुटेरों ने इस जहाज को घेर लिया और उस पर हमला करने की कोशिश की। इस अचानक आए गंभीर खतरे को भांपते हुए जहाज के कैप्टन ने अत्यंत सूझबूझ और तत्परता का परिचय दिया। कैप्टन ने बिना एक पल गंवाए जहाज के सभी क्रू सदस्यों को तुरंत एक सुरक्षित और मजबूत कमरे के भीतर पहुंचाया, जिसे समुद्री भाषा में ‘सिटाडेल’ कहा जाता है। इसके साथ ही उन्होंने तुरंत भारतीय नौसेना से मदद के लिए आपातकालीन संपर्क साधा।

सिटाडेल जहाज के भीतर बनाया जाने वाला एक ऐसा अति-सुरक्षित और मजबूत कमरा होता है, जिसमें क्रू के सदस्यों के छिपने के लिए पर्याप्त व्यवस्था होती है। इसमें आपातकालीन स्थिति के लिए खाने-पीने की जरूरी चीजें और आधुनिक संचार के साधन पहले से ही मौजूद रहते हैं। जब भी समुद्र में लुटेरों का हमला होता है, तो क्रू के सदस्य इस सुरक्षित स्थान पर शरण ले सकते हैं। ‘गोल्डन आर्सेनल’ पर जब हमला हुआ, तो सभी क्रू सदस्यों को इसी सिटाडेल में सुरक्षित भेज दिया गया था, जिसमें एक भारतीय नाविक भी शामिल था। लुटेरों ने इस मजबूत कमरे को भेदने की बहुत कोशिश की, लेकिन वे इसमें पूरी तरह नाकाम रहे और आखिरकार मजबूर होकर जहाज छोड़कर वहां से भाग खड़े हुए।

इस पूरी घटना का आधिकारिक तौर पर जिक्र इस सप्ताह आयोजित की गई नेशनल पोर्ट सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान किया गया। समुद्री नियामक डीजीएमए के डिप्टी नॉटिकल एडवाइजर कैप्टन विक्रम सिंह मन्हास ने देश के सभी क्रू सदस्यों और जहाजों के मास्टर्स से यह अपील की है कि वे समुद्र में सफर के दौरान अत्यधिक सतर्क और सावधान रहें। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि समुद्री डकैती की लगातार बढ़ रही घटनाओं के बीच जहाजों को ‘बेस्ट मैनेजमेंट प्रैक्टिस’ यानी बीएमपी के तहत बताए गए सभी सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करना चाहिए।

कैप्टन मन्हास ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान समय में सोमाली समुद्री लुटेरों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्र में कुल चार जहाजों को बंधक बना रखा है। इनमें से तीन जहाज ऐसे हैं जिन पर भारतीय क्रू के सदस्य मौजूद हैं। एक जहाज पर एक भारतीय नाविक फंसा हुआ है, जबकि बाकी के दो जहाजों पर क्रमशः 5 और 11 भारतीय क्रू सदस्य बंधक बने हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि एक बार समुद्री लुटेरे किसी जहाज पर अपना नियंत्रण या कब्जा जमा लेते हैं, तो उसके बाद के हालात बेहद पेचीदा और मुश्किल हो जाते हैं, और पूरा मामला लंबी कूटनीतिक बातचीत पर निर्भर हो जाता है।

सरकार इन सभी मामलों को लेकर पूरी तरह गंभीर है और भारतीय नाविकों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। कैप्टन मन्हास ने इस बात पर जोर दिया कि सबसे बेहतर तरीका यह है कि लुटेरों को जहाज पर कब्जा करने से पहले ही रोक दिया जाए और इसके लिए तय किए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत तथा पुख्ता बनाने के लिए केंद्र सरकार आगामी 15 अगस्त को एक नया ट्रैकिंग डैशबोर्ड लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। इस आधुनिक डैशबोर्ड के माध्यम से किसी भी समुद्र में सफर कर रहे जहाज पर मौजूद प्रत्येक भारतीय नाविक की लाइव लोकेशन को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

इस बीच, केंद्रीय शिपिंग और पोर्ट्स मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शनिवार को एक नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ई-समुद्र’ का आधिकारिक शुभारंभ किया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म देश के नाविकों, बड़ी शिपिंग कंपनियों, बंदरगाहों और समुद्री अर्थव्यवस्था से जुड़े सभी हितधारकों को एक ही मंच पर लाने का काम करेगा। इस मौके पर मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत आज वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को तेजी से मजबूत कर रहा है, इसलिए यह बेहद जरूरी है कि प्रत्येक भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित, सम्मानित और समर्थित महसूस करे।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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