पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने हवाई और समुद्री मार्ग से 11 लाख से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकाला।

पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए दुनिया का एक बड़ा बचाव अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया है। खाड़ी क्षेत्र में उपजे इस गंभीर संकट के दौरान विदेश मंत्रालय और पश्चिम एशिया में स्थित भारतीय दूतावासों ने असाधारण सक्रियता दिखाते हुए अब तक हजारों भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की है। इस अभियान की सफलता का प्रमाण इसी बात से मिलता है कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों से न केवल सामान्य नागरिक, बल्कि गहरे समुद्र में फंसे नाविकों और मछुआरों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है। भारत की इस 'सॉफ्ट पावर' और कूटनीतिक पहुंच ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि संकट की स्थिति में अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 28 फरवरी 2026 को खाड़ी संकट की शुरुआत होने के बाद से अब तक 2,563 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित भारत लाया जा चुका है। विदेश मंत्रालय इन नाविकों के हितों की रक्षा के लिए सभी संबंधित हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। इसी कड़ी में 18 अप्रैल 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील मार्ग से गुजर रहे तेल टैंकर 'देश गरिमा' पर सवार 31 भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई। करीब 97,422 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा यह जहाज पूरी तरह सुरक्षित है और इसके 22 अप्रैल तक मुंबई बंदरगाह पहुंचने की प्रबल संभावना है।

हवाई मार्ग से भारतीयों को निकालने की प्रक्रिया इससे भी कहीं अधिक व्यापक रही है। प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संकट शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 11 लाख 30 हजार भारतीय हवाई यात्रियों को सुरक्षित स्वदेश पहुंचाया जा चुका है। विशेष रूप से ईरान में फंसे भारतीयों के लिए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एक वैकल्पिक और सुरक्षित कॉरिडोर तैयार किया है। ईरान का एयरस्पेस कार्गो और चार्टर्ड उड़ानों के लिए सीमित रूप से खुला होने के कारण भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते भारत भेजने की विशेष व्यवस्था की गई है। इस रूट के माध्यम से अब तक 2,358 भारतीय नागरिक स्वदेश लौटे हैं, जिनमें 1,041 छात्र और 657 मछुआरे शामिल हैं।

खाड़ी के विभिन्न देशों से भारतीयों की वापसी के लिए जटिल कूटनीतिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से अब तक लगभग 110 उड़ानों का संचालन किया गया है, जबकि सऊदी अरब और ओमान के हवाई अड्डों से भी निरंतर भारत के लिए उड़ानें जारी हैं। हालांकि कुवैत का एयरस्पेस बंद होने के कारण वहां फंसे भारतीयों को सड़क मार्ग से सऊदी अरब लाकर फिर हवाई मार्ग से भारत भेजा जा रहा है। इजरायल जैसे अत्यधिक तनावपूर्ण क्षेत्र में फंसे नागरिकों के लिए जॉर्डन और मिस्र को ट्रांजिट पॉइंट बनाया गया है। भारत का यह व्यापक बचाव अभियान न केवल उसकी सैन्य और नागरिक उड्डयन क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह संकटग्रस्त क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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