ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: गैलाथिया बे पोर्ट पर 2028 से शुरू होगा निर्माण, मोदी सरकार ने तय की समयसीमा|
तीन चरणों में पूरा होगा ग्रेट निकोबार का मेगा प्रोजेक्ट, समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिए बनेगा भारत का नया सामरिक केंद्र|

ग्रेट निकोबार में गैलाथिया बे पोर्ट के प्रस्तावित क्षेत्र की स्थिति, जहां तीन चरणों में विकास कार्य किए जाएंगे।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट अब अपने अगले पड़ाव के लिए पूरी तरह तैयार है। देश की केंद्र सरकार ने विपक्ष और अन्य वर्गों की तमाम आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गैलाथिया बे पोर्ट परियोजना पर काम 2028 से शुरू हो जाएगा। यह परियोजना न केवल भारत के समुद्री व्यापार को एक नई दिशा देगी, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर एक बड़ा केंद्र बनाने में भी मदद करेगी।
इस विशाल परियोजना को तीन अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाना है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट कुल 166.10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला होगा। पहले चरण के अंतर्गत 72.12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में काम किया जाएगा, जिसकी समयसीमा 2025 से 2035 तक निर्धारित की गई है। इसके बाद, दूसरे चरण में 45.27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का विकास 2036 से 2041 के बीच होगा। परियोजना का तीसरा और अंतिम चरण 48.71 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा, जिसे 2042 से 2047 के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्रीय जहाजरानी और बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं द्वीप के निवासियों से संवाद किया है। उनके अनुसार, स्थानीय लोग इस परियोजना की सफलता को लेकर काफी उत्साहित हैं। हालांकि, यह प्रोजेक्ट लंबे समय से पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण चर्चा में रहा है। विशेष रूप से लेदरबैक कछुओं के प्रजनन स्थलों और मूंगे की चट्टानों (कोरल रीफ) को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर पर्यावरणविदों ने सवाल उठाए थे।
सरकार ने इन चिंताओं पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस परियोजना को तैयार करते समय पारिस्थितिक संतुलन का पूरा ध्यान रखा गया है। केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि पर्यावरणविदों द्वारा उठाए गए हर मुद्दे का तथ्यात्मक और उचित समाधान निकाला गया है, ताकि विकास और प्रकृति के बीच कोई विरोधाभास न रहे।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को भारत का प्रमुख आर्थिक और सामरिक केंद्र बनाना है। यह स्थान अंतरराष्ट्रीय ईस्ट-वेस्ट शिपिंग रूट से मात्र 40 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है। इस टर्मिनल के तैयार होने के बाद, भारत को ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह के लिए किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह परियोजना भविष्य के दशकों में राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापारिक दृष्टि से निर्णायक साबित होगी।
इस परियोजना में चार मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण 'इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल' (आईसीटीटी) है, जिसकी क्षमता 14.2 मिलियन टीईयू होगी। इसके अलावा, यहां एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाया जाएगा, जो पीक ऑवर में 4,000 यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। साथ ही, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई टाउनशिप और ऊर्जा जरूरतों के लिए 450 एमवीए क्षमता वाला हाइब्रिड पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा, जो प्राकृतिक गैस और सौर ऊर्जा जैसे स्वच्छ स्रोतों पर निर्भर रहेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
