विंडफॉल टैक्स में बड़ी कटौती: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला|
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के बाद केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन पर निर्यात शुल्क में की बड़ी कटौती।

केंद्र सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में की गई कटौती को दर्शाता एक सांकेतिक ग्राफिक।
नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रही लगातार गिरावट के बीच केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल और ईंधन के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स यानी विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में भारी कटौती की घोषणा की है। इस नए फैसले के तहत पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन यानी एटीएफ के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी को तत्काल प्रभाव से कम कर दिया गया है। सरकार द्वारा लिया गया यह कदम वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दर्ज की गई ग्यारह प्रतिशत की भारी गिरावट के बाद उठाया गया है, जिससे घरेलू रिफाइनिंग कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
आधिकारिक सरकारी अधिसूचना के अनुसार, इस संशोधित व्यवस्था को आगामी पंद्रह दिनों के लिए लागू किया जा रहा है। सरकार हर दो हफ्ते में पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले टैक्स और निर्यात शुल्क की समीक्षा करती है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव के आधार पर तय किया जाता है। नए नियमों के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को तीन रुपये प्रति लीटर से घटाकर अब आधा यानी डेढ़ रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेट्रोल निर्यात पर रोड एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस लागू नहीं होगा। वहीं दूसरी ओर, डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को साढ़े सोलह रुपये से घटाकर साढ़े तेरह रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। विमान ईंधन के मोर्चे पर भी कंपनियों को राहत देते हुए एटीएफ पर निर्यात शुल्क को सोलह रुपये से घटाकर साढ़े नौ रुपये प्रति लीटर पर ला दिया गया है।
सरकार के इस बड़े आर्थिक फैसले का सीधा असर देश के बड़े प्राइवेट रिफाइनर्स और तेल उत्पादक कंपनियों पर पड़ने जा रहा है। भारत में विंडफॉल टैक्स की शुरुआत पहली बार जुलाई 2022 में की गई थी, जब रूस-यूक्रेन संकट और भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई थी और कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। उस दौरान निजी तेल कंपनियां घरेलू बाजार में आपूर्ति करने के बजाय विदेशी बाजारों में महंगे दामों पर तेल निर्यात कर अत्यधिक मुनाफा कमा रही थीं। इसे नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने विंडफॉल टैक्स लगाया था। इस टैक्स में कटौती का सबसे बड़ा फायदा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी दिग्गज निजी रिफाइनिंग कंपनी को होगा, जो गुजरात के जामनगर में स्थित अपनी दो अत्याधुनिक रिफाइनरियों के माध्यम से देश के कुल विमान ईंधन उत्पादन का लगभग एक-चौथाई हिस्सा उत्पादित करती है और इसका एक बड़ा हिस्सा विदेशों में निर्यात करती है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां जैसे ओएनजीसी और ऑयल इंडिया भी इस टैक्स कटौती से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगी।
एक तरफ जहां निर्यातकों को टैक्स में राहत मिली है, वहीं सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि स्थानीय बाजार में पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा एक्साइज ड्यूटी की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले कुछ दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण उपभोक्ताओं में असंतोष देखा जा रहा था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रिफाइनर्स के लिए कच्चे तेल की बास्केट की कीमत अब सौ डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आकर सत्तानवे दशमलव बावन डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। वहीं, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी गिरकर इक्यानवे दशमलव बारह डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई यह मंदी आने वाले समय में घरेलू बाजार में भी ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने या उनमें कटौती करने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। सरकार का यह कदम आर्थिक संतुलन साधने और भारतीय ऊर्जा क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
