नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। एलपीजी टैंकर 'शिवालिक' की सफल वापसी के बाद, अब कच्चे तेल (Crude Oil) से लदा एक और भारतीय जहाज 'जग लाडकी' सुरक्षित रूप से वतन वापसी की राह पर है। शिपिंग मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया है कि जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं।

81,000 टन कच्चे तेल की खेप

शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि भारतीय ध्वज वाला जहाज 'जग लाडकी' लगभग 81,000 टन 'मुरबान' कच्चा तेल लेकर मुंद्रा बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। यह जहाज 14 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से रवाना हुआ था और कल यानी 18 मार्च को इसके भारत पहुँचने की उम्मीद है। मुरबान क्रूड की यह बड़ी खेप भारत की रिफाइनरियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

होर्मुज में फंसे 22 भारतीय जहाज और नाविकों की स्थिति

फारस की खाड़ी और होर्मुज के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्रालय ने स्पष्ट जानकारी दी है। अधिकारी के अनुसार:

  • इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज मौजूद हैं।
  • इन जहाजों पर कुल 611 भारतीय नाविक सवार हैं।
  • पिछले 24 घंटों में किसी भी अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।
  • भारत सरकार हर जहाज और उसके चालक दल के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए है और स्थिति की हर पल निगरानी की जा रही है।

क्यों अहम है इन टैंकरों का लौटना?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है। आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से मंगाता है।

28 फरवरी को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच शुरू हुई सैन्य कार्रवाई से पहले, भारत का आधा कच्चा तेल और लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आपूर्ति यूएई और सऊदी अरब जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आती थी। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर भारत की रसोई और परिवहन पर पड़ सकता है। ऐसे में 'जग लाडकी' जैसे जहाजों का सुरक्षित निकलना भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए एक बड़ी जीत है।

सतर्क है भारत सरकार

पश्चिम एशिया के इस नाजुक दौर में भारत सरकार बेहद संभलकर कदम उठा रही है। शिपिंग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीय जहाजों को 'सेफ पैसेज' मिलता रहे। 'जग लाडकी' की वापसी यह भरोसा दिलाती है कि तनाव के बावजूद भारत की तेल आपूर्ति श्रृंखला टूटी नहीं है।


कल जब 'जग लाडकी' मुंद्रा पोर्ट के टर्मिनल पर लंगर डालेगा, तो यह केवल कच्चे तेल की डिलीवरी नहीं होगी, बल्कि कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता का एक और प्रमाण होगा। देश की नजरें अब उन 611 नाविकों और 22 जहाजों पर टिकी हैं जो अभी भी खाड़ी क्षेत्र में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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