गाजियाबाद में सिस्टम की लापरवाही ने ली मासूम की जान- कूड़े के 'खूनी तालाब' ने निगल ली 6 साल के आतिफ की जिंदगी"
लोनी की नसबंदी कॉलोनी में 22 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दलदल से मिला 6 वर्षीय बच्चे का शव।

गाजियाबाद के लोनी में बच्चे के डूबने के बाद तालाब के पास उमड़ी भीड़ और रेस्क्यू में जुटे बचाव दल।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद अंतर्गत लोनी क्षेत्र में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां प्रशासनिक अनदेखी और कचरा प्रबंधन की विफलता ने एक छह वर्षीय मासूम की जान ले ली। लोनी की नसबंदी कॉलोनी के पास स्थित कूड़े और गंदगी से पटे एक तालाबनुमा दलदल में डूबने से बच्चे की मृत्यु हो गई। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि शहरी नियोजन और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। रविवार शाम को घटित इस हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों को करीब 22 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे का निष्प्राण शरीर बरामद हुआ।
घटनाक्रम के अनुसार, नसबंदी कॉलोनी निवासी आरिफ का छह वर्षीय पुत्र आतिफ रविवार शाम को घर के पास पतंग लूटने के दौरान दौड़ते हुए स्थानीय श्मशान घाट की ओर चला गया था। श्मशान घाट के समीप ही एक विशाल गड्ढा है जो समय के साथ कचरे और मलबे के ढेर से भर चुका है। बारिश और गंदगी के कारण इस गड्ढे ने एक खतरनाक तालाबनुमा दलदल का रूप ले लिया था। पतंग के पीछे भागते हुए आतिफ का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे इस दलदल में जा गिरा। आसपास मौजूद लोगों ने जब तक कुछ समझा, बच्चा कचरे और पानी के नीचे ओझल हो चुका था।
हादसे की सूचना मिलते ही अंकुर विहार थाने की पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। रात के अंधेरे और कूड़े के ढेर के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी बाधाएं आईं। स्थानीय गोताखोरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रातभर तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। सोमवार सुबह स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। गोताखोरों के मुताबिक, तालाब में पानी की गहराई करीब 25 फीट थी, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती सात से आठ फीट मोटी दलदल की परत थी। कूड़ा-कचरा नीचे तक धंसा होने के कारण शव को ढूंढना लगभग असंभव हो रहा था। आखिरकार सोमवार दोपहर को स्थानीय गोताखोरों ने बच्चे के शव को कचरे के नीचे से बाहर निकाला।
इस दुखद घटना ने स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रूप से कूड़ा डंप किया जा रहा था, जिसके कारण यह स्थान 'मौत के जाल' में तब्दील हो गया। नियमानुसार श्मशान घाट और सार्वजनिक स्थलों के पास इस तरह के खुले गड्ढों की बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड अनिवार्य हैं, लेकिन यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र के विकास के लिए 99 लाख रुपये का टेंडर निकाला गया था, लेकिन तकनीकी कारणों और विधायक निधि से जुड़े अन्य कार्यों के चलते यह प्रक्रिया लंबित रही। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाने का आश्वासन दिया है।

Lalita Rajput
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