कुदरत का करिश्मा या कोई रहस्य? आखिर फारस की खाड़ी में ही क्यों भरा है दुनिया का सबसे ज्यादा तेल!
वैज्ञानिकों ने टेथिस महासागर, टेक्टोनिक प्लेटों के दबाव और विशेष चट्टानी संरचनाओं के आधार पर फारस की खाड़ी में बेहिसाब तेल होने की गुत्थी सुलझाई है।

फारस की खाड़ी का नक्शा और तेल निष्कर्षण का प्रतीकात्मक चित्रण
Why Middle East has so much oil : दुनिया की अर्थव्यवस्था जिस ईंधन के दम पर रफ्तार भरती है, उसका सबसे बड़ा स्रोत फारस की खाड़ी के रेतीले धोरों और नीले समंदर के नीचे छिपा है। अक्सर यह सवाल विशेषज्ञों और आम जनता के जेहन में कौंधता है कि आखिर कुदरत ने इस एक विशेष भू-भाग पर ही तेल की इतनी मेहरबानी क्यों दिखाई और दुनिया के अन्य हिस्से इस दौड़ में पीछे क्यों रह गए? यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि करोड़ों सालों तक चली उन दुर्लभ और जटिल भू-गर्भीय परिस्थितियों का परिणाम है, जिसने इस क्षेत्र को दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा भंडार में तब्दील कर दिया।
इस कहानी की शुरुआत आज से लगभग 10 से 20 करोड़ साल पहले हुई थी, जब वर्तमान मिडिल ईस्ट का अधिकांश हिस्सा 'टेथिस' नामक एक विशाल, गर्म और उथले महासागर की गोद में समाया हुआ था। यह समुद्र सूक्ष्म जीवों और वनस्पतियों से इतना लबालब था कि इसकी तलहटी जैविक पदार्थों का घर बन गई थी। जब ये जीव मरते थे, तो वे समुद्र की गहराई में जमा हो जाते थे। वहां ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण ये जीव सड़ने के बजाय सुरक्षित रहे और समय के साथ इनके ऊपर तलछट की मोटी परतें जमती चली गईं।
लाखों सालों के इस सफर में पृथ्वी की आंतरिक हलचलों ने एक निर्णायक भूमिका निभाई। जब अरब और यूरेशिया की टेक्टोनिक प्लेटों के बीच भीषण टक्कर हुई, तो न केवल जाग्रोस पर्वत जैसी विशाल पर्वतमालाएं बनीं, बल्कि जमीन के भीतर गहरे प्राकृतिक गड्ढे और गुंबद भी तैयार हो गए। पृथ्वी के गर्भ की प्रचंड गर्मी और असहनीय दबाव ने उन दबे हुए जैविक पदार्थों को धीरे-धीरे हाइड्रोकार्बन यानी कच्चे तेल में बदलना शुरू कर दिया। यह एक ऐसी रासायनिक भट्टी थी, जो लाखों वर्षों तक निरंतर जलती रही।
हालांकि, तेल का बनना इस प्रक्रिया का केवल आधा हिस्सा था। तेल को जमीन के भीतर सुरक्षित रखने के लिए कुदरत ने 'कैप रॉक्स' यानी चूना पत्थर और नमक की चट्टानों का एक मजबूत ढक्कन तैयार किया। इन गुंबदनुमा संरचनाओं ने तेल को सतह पर रिसने से रोक दिया और उसे अरबों वर्षों तक जमीन के नीचे कैद रखा। दुनिया के अन्य हिस्सों में भी तेल बना, लेकिन कहीं दबाव कम था तो कहीं तेल को रोकने के लिए ये प्राकृतिक जाल मौजूद नहीं थे। फारस की खाड़ी की विशिष्टता यही है कि यहां प्रचुर जैविक पदार्थ, सही तापमान, दबाव और अभेद्य चट्टानी संरचनाएं—सभी एक साथ एक ही स्थान पर मिल गईं। आज यही 'ब्लैक गोल्ड' वैश्विक राजनीति और शक्ति का केंद्र बना हुआ है, जो हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के रहस्यों ने ही मानव सभ्यता के भविष्य की रूपरेखा तय की है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
