हैदराबाद में रसोई गैस का महासंकट: क्या अगले 48 घंटों में थम जाएगा 'शहर-ए-जायका' का पहिया?

हैदराबाद/तेलंगाना:

अपनी लजीज बिरयानी और खास खान-पान के लिए दुनिया भर में मशहूर 'निजामों का शहर' हैदराबाद इस समय एक अभूतपूर्व संकट के मुहाने पर खड़ा है। यह संकट खाने की कमी का नहीं, बल्कि उसे पकाने वाले ईंधन का है। पूरे तेलंगाना और विशेष रूप से हैदराबाद में कमर्शियल LPG (व्यावसायिक रसोई गैस) की भारी किल्लत के चलते शहर के लगभग 90 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट्स अगले 48 घंटों के भीतर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

होटल एसोसिएशन की गंभीर चेतावनी

तेलंगाना स्टेट होटल एसोसिएशन (TSHA) ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे 'फूड इंडस्ट्री की इमरजेंसी' करार दिया है। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष, एस. राम मूर्ति ने स्पष्ट किया कि शहर की खाद्य व्यवस्था अब केवल कुछ घंटों की मोहताज रह गई है। उनके अनुसार, हैदराबाद के हजारों छोटे और मध्यम दर्जे के होटल, जो आम जनता और कामकाजी लोगों की दैनिक भोजन की जरूरतों को पूरा करते हैं, उनके पास केवल 24 से 48 घंटे का ही गैस स्टॉक बचा है।

छोटे भोजनालयों पर सबसे पहले गिरेगी गाज

बड़े और नामी रेस्टोरेंट्स के पास तो फिर भी कुछ दिनों का रिजर्व स्टॉक हो सकता है, लेकिन शहर की असली जान माने जाने वाले छोटे कैफे, टिफिन सेंटर्स और मिड-लेवल होटल्स 'हैंड-टू-माउथ' स्थिति में हैं। ये प्रतिष्ठान हर दिन आने वाले सिलेंडरों पर निर्भर रहते हैं। आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) टूटने के कारण इन छोटे कारोबारियों को नए सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। यदि अगले दो दिनों में सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो हजारों की संख्या में ये भोजनालय अपनी सेवाएं बंद करने को मजबूर होंगे।

आपूर्ति रुकने का मुख्य कारण

इस संकट के पीछे कई वैश्विक और स्थानीय कारण बताए जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर अब क्षेत्रीय स्तर पर दिखने लगा है। कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति में आई इस अचानक गिरावट ने वितरण प्रणाली को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। डीलरों का कहना है कि उन्हें तेल कंपनियों से पर्याप्त मात्रा में कोटा नहीं मिल रहा है, जिसके कारण वे होटलों की मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

रोजगार और आम जनता पर असर

अगर 90 प्रतिशत रेस्टोरेंट्स बंद होते हैं, तो इसका असर केवल व्यापार पर ही नहीं, बल्कि लाखों लोगों के रोजगार पर भी पड़ेगा। वेटर्स, रसोइए, डिलीवरी पार्टनर्स और सफाई कर्मचारियों की आजीविका पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। साथ ही, हैदराबाद जैसे शहर में जहां बड़ी संख्या में आईटी प्रोफेशनल और छात्र रहते हैं, जो पूरी तरह बाहर के खाने पर निर्भर हैं, उनके लिए भी भोजन का बड़ा संकट पैदा हो सकता है।

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

तेलंगाना स्टेट होटल एसोसिएशन ने राज्य और केंद्र सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को प्राथमिकता के आधार पर कमर्शियल गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि इस विशाल उद्योग को पूरी तरह ठप होने से बचाया जा सके। कई रेस्टोरेंट मालिकों ने तो यहां तक कहा है कि यदि गैस नहीं मिली, तो उन्हें मजबूरन पुराने तरीकों यानी लकड़ी या कोयले के चूल्हों की ओर लौटना होगा, जो शहरी इलाकों में व्यावहारिक नहीं है।


फिलहाल, हैदराबाद के होटल मालिकों की नजरें डिलीवरी वैन और सरकारी आश्वासनों पर टिकी हैं। अगले 48 घंटे शहर की खाद्य अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक साबित होंगे। यदि आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो हैदराबाद की गलियों में महकने वाली पकवानों की खुशबू कुछ समय के लिए शांत हो सकती है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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