ओडिशा के गंजाम जिले के धाराकोट इलाके में 12 साल के एक आदिवासी बच्चे ने दुर्घटना के बाद जिस तरह हिम्मत दिखाई, उसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया। साइकिल से स्कूल जाते समय हुए हादसे में उसके पेट के निचले हिस्से में गहरी चोट लगी और उसकी छोटी आंत का एक हिस्सा शरीर से बाहर निकल आया। गंभीर चोट और तेज दर्द के बावजूद बच्चा घबराया नहीं। उसने बाहर निकली आंत को अपनी स्कूल यूनिफॉर्म से सावधानीपूर्वक ढका और करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर पहुंच गया।

चीनू धाराकोट ब्लॉक के एक दूर-दराज गांव का रहने वाला है और पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। सोमवार को वह पहाड़ी इलाके से साइकिल चलाकर स्कूल जा रहा था। रास्ते में अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह गिर पड़ा। सड़क के किनारे मौजूद किसी नुकीली चीज से उसके पेट में गहरी चोट लग गई। हादसे में उसके पेट से छोटी आंत का हिस्सा बाहर निकल आया।

इतनी गंभीर चोट के बाद भी चीनू ने संयम बनाए रखा। उसने बाहर निकली आंत को अपनी स्कूल यूनिफॉर्म से लपेटा और किसी तरह करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करके घर पहुंचा। घर पहुंचने पर उसकी हालत देखकर माता-पिता घबरा गए। इसके बाद रिश्तेदारों की मदद से उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर नजदीकी बडागाडा अस्पताल ले जाया गया।

प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसी दिन उसे बेरहामपुर स्थित MKCG मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल रेफर कर दिया। यहां पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मानस रंजन डैश के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने उसका इलाज शुरू किया।

डॉक्टरों ने दो घंटे से अधिक समय तक इमरजेंसी सर्जरी की। डॉ. मानस रंजन डैश के मुताबिक, पेट के निचले हिस्से में लगी चोट के कारण छोटी आंत बाहर निकल आई थी। राहत की बात यह रही कि आंत और शरीर के दूसरे जरूरी अंगों को गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा था।

सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने बाहर निकली आंत को सावधानीपूर्वक वापस पेट के अंदर रखा और चोट वाले हिस्से का इलाज किया। इलाज के बाद चीनू की हालत में सुधार हुआ। डॉक्टरों के अनुसार, उसने ठोस खाना भी शुरू कर दिया है और उसे अगले दो-तीन दिनों में अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की उम्मीद है।

इलाज करने वाली टीम ने बच्चे के साहस और सूझ-बूझ की भी तारीफ की। डॉ. मानस रंजन डैश ने कहा कि चीनू की जान बचाने में सर्जरी के साथ-साथ उसकी हिम्मत और स्थिति को संभालने की क्षमता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, सर्जरी टीम में शामिल एनेस्थीसिया के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जगदीप नायक ने बताया कि दर्द के बावजूद बच्चा शांत रहा। उसने बाहर निकली आंत को सुरक्षित रखा और अकेले करीब दो किलोमीटर चलकर घर पहुंचा।

डॉक्टरों के मुताबिक, इतनी गंभीर चोट के बावजूद बच्चे का इस तरह शांत रहना और समय पर घर पहुंचना उसके मजबूत हौसले को दिखाता है। फिलहाल इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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