खामेनेई की मौत के बाद श्रीनगर में प्रदर्शन: सड़कों पर उतरे लोग, क्या है कश्मीर का हाल?

वैश्विक राजनीति में एक ऐतिहासिक और बड़े बदलाव के संकेत के साथ, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर सामने आई है। 28 फरवरी और 1 मार्च, 2026 को हुए अमेरिका और इजरायल के एक संयुक्त सैन्य ऑपरेशन में खामेनेई की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस घटना ने न केवल मिडिल ईस्ट की स्थिति को गंभीर बना दिया है, बल्कि इसका प्रभाव भारत के जम्मू-कश्मीर तक भी महसूस किया जा रहा है।

कश्मीर में विरोध की गूंज

ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत की खबर मिलते ही कश्मीर के कई हिस्सों में हलचल मच गई। विशेषकर श्रीनगर के शिया बहुल इलाकों में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसमें शामिल लोगों का गुस्सा साफ तौर पर दिखाई दे रहा था।

प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हाथों में खामेनेई की तस्वीरें लिए हुए लोगों ने अपने नेता के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। स्थानीय सुरक्षा बलों ने स्थिति पर कड़ी नजर रखी है, ताकि प्रदर्शन के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो। अधिकारी लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। श्रीनगर की सड़कों पर इस तरह का जनसैलाब इस बात को दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही घटनाओं का असर कश्मीर की जनता की भावनाओं पर कितना गहरा होता है।

क्या हुआ था ईरान में?

ईरान की सरकारी मीडिया ने रविवार सुबह आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की कि इजरायल और अमेरिका के एक बड़े हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गई है। यह हमला उनके आवास पर किया गया था, जिसे एक बहुत बड़ा सैन्य ऑपरेशन माना जा रहा है।

अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक देश की कमान संभाली थी। उनके अचानक निधन ने ईरान में एक बड़ा राजनीतिक शून्यता (vacuum) पैदा कर दिया है। ईरान सरकार ने इस घटना के बाद 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है, जिससे देश भर में मातम का माहौल है।

महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद भारत की राजनीति और जम्मू-कश्मीर के नेताओं की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी संवेदनाएं साझा कीं।

अपने पोस्ट में उन्होंने ईरान को मुस्लिम दुनिया की एक जानी-मानी आवाज बताया। उन्होंने लिखा, "एक ऐसा देश जो लंबे समय से मुस्लिम दुनिया की एक जानी-मानी आवाज रहा है, उसे अपनी ताकत पक्के विश्वास और भरोसे से मिलती है। कोई भी मिसाइल या खतरा उसकी आजादी को खत्म नहीं कर सकता या उसकी हिम्मत को नहीं तोड़ सकता।" महबूबा मुफ्ती ने आगे ईरान और उसके नागरिकों के लिए खुदा से हिफाजत की दुआ भी मांगी।

आगे क्या?

ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत ने मिडिल ईस्ट में एक ऐसी अनिश्चितता पैदा कर दी है जिसका अंदाजा लगाना फिलहाल मुश्किल है। जहां एक ओर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने 'कठोर बदला' लेने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर दुनिया भर के देश शांति की अपील कर रहे हैं।

भारत सहित दुनिया के कई देश इस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। कश्मीर में हो रहे प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि इस घटना की गूंज बहुत दूर तक जाएगी। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' अब अगला कदम क्या उठाती है और क्या यह तनाव कम होगा या और बढ़ेगा।

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