रेमंड के 'द कंप्लीट मैन' विजयपत सिंघानिया का निधन: एक साम्राज्य खड़ा करने वाले दिग्गज की अधूरी दास्तां

मुंबई:

भारतीय कॉर्पोरेट जगत के एक युग का अंत हो गया है। रेमंड (Raymond) को एक साधारण कपड़े की मिल से अंतरराष्ट्रीय स्तर का ब्रांड बनाने वाले पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का मुंबई में निधन हो गया। 80 और 90 के दशक में भारतीय पुरुषों के पहनावे को 'द कंप्लीट मैन' की पहचान देने वाले सिंघानिया की जीवन यात्रा जितनी भव्य रही, उसका अंत उतना ही भावुक और विवादास्पद रहा। कभी मुकेश अंबानी के 'एंटीलिया' से भी ऊंची इमारत में रहने वाले इस दिग्गज उद्योगपति को अपने जीवन के आखिरी साल किराए के मकान में बिताने पड़े।

रेमंड को बनाया ग्लोबल ब्रांड

विजयपत सिंघानिया ने साल 1980 में रेमंड ग्रुप की कमान संभाली थी। उस समय यह एक छोटी सी मिल हुआ करती थी जो मुख्य रूप से ऊनी कपड़ों का उत्पादन करती थी। विजयपत की दूरदर्शिता ने कंपनी का कायाकल्प कर दिया। उन्होंने पारंपरिक ढर्रे से हटकर सिंथेटिक कपड़ों, डेनिम और हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया। उनकी अगुवाई में रेमंड ने न केवल भारतीय बाजार पर कब्जा किया, बल्कि दुनिया के कई देशों में अपना परचम लहराया। आज रेमंड ग्रुप का बिजनेस रियल एस्टेट, इंजीनियरिंग और कंज्यूमर केयर जैसे विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है।

ऐश्वर्य और जेके हाउस की भव्यता

विजयपत सिंघानिया की गिनती कभी देश के सबसे अमीर व्यक्तियों में होती थी। उनकी जीवनशैली किसी राजा-महाराजा से कम नहीं थी। वे मुंबई के मालाबार हिल स्थित 'जेके हाउस' (JK House) में रहते थे। यह 37 मंजिला इमारत मुकेश अंबानी के प्रसिद्ध घर 'एंटीलिया' से भी ऊंची मानी जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक समय में उनकी कुल नेटवर्थ 12,000 करोड़ रुपये से अधिक थी। इसके अलावा, वे विमान उड़ाने के भी शौकीन थे और उन्होंने कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किए थे।

2015: वह मोड़ जिसने सब बदल दिया

विजयपत सिंघानिया की जिंदगी में साल 2015 एक ऐसा मोड़ लेकर आया, जिसने उनकी पूरी दुनिया बदल दी। उन्होंने अपने प्यार और भरोसे के चलते रेमंड लिमिटेड में अपनी पूरी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने बेटे गौतम सिंघानिया के नाम ट्रांसफर कर दी। उस समय केवल उन शेयरों की बाजार कीमत 1,000 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा थी। सिंघानिया का मानना था कि उनके बाद उनका बेटा इस साम्राज्य को आगे ले जाएगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

बाप-बेटे का विवाद और बेबसी

संपत्ति ट्रांसफर करने के कुछ ही समय बाद बाप-बेटे के रिश्तों में कड़वाहट आ गई। यह विवाद एक फ्लैट के स्वामित्व को लेकर शुरू हुआ था, जो धीरे-धीरे कोर्ट-कचहरी तक पहुंच गया। हालात इतने खराब हो गए कि जिस जेके हाउस को उन्होंने खुद बनवाया था, उन्हें वहीं से बाहर होना पड़ा।

विजयपत सिंघानिया ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि उनके बेटे ने उनसे घर, कार और ड्राइवर जैसी बुनियादी सुविधाएं भी छीन ली हैं। यहां तक कि उन्हें अपने नाम के साथ 'चेयरमैन एमेरिटस' लिखने से भी रोक दिया गया। देश के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल रहे सिंघानिया को दक्षिण मुंबई के एक इलाके में किराए के मकान में रहने को मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कई बार इंटरव्यू में दुख जाहिर किया था कि "अपने बच्चों को सब कुछ दे देना सबसे बड़ी गलती थी।"

कितनी संपत्ति छोड़ गए सिंघानिया?

विजयपत सिंघानिया अपने पीछे कितनी निजी संपत्ति छोड़ गए हैं, इसका सटीक आंकड़ा देना मुश्किल है। इसका कारण यह है कि उन्होंने अपनी संपत्ति का लगभग सारा हिस्सा (शेयर और एसेट्स) साल 2015 में ही अपने बेटे को सौंप दिया था। वर्तमान में उनके बेटे गौतम सिंघानिया की नेटवर्थ 11,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जाती है। विजयपत सिंघानिया के पास अंतिम समय में कानूनी तौर पर बहुत कम संपत्ति बची थी, लेकिन उनकी असली विरासत वह 'रेमंड' ब्रांड है, जो आज भी भारत के हर घर में पहचाना जाता है।


विजयपत सिंघानिया का निधन कॉर्पोरेट जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने भारतीय उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई। हालांकि, उनका जीवन इस बात का भी गवाह बना कि वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। 'द कंप्लीट मैन' का टैग देने वाले इस शख्स की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सबक भी है और प्रेरणा भी। उनके निधन से व्यापारिक दुनिया में शोक की लहर है और लोग उन्हें एक साहसी पायलट और कुशल उद्योगपति के रूप में याद कर रहे हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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