साहित्य से विज्ञान तक: भारत मंडपम में सजेगा वर्ल्ड बुक फेयर; एंट्री रहेगी फ्री
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 53वें विश्व पुस्तक मेले का शुभारंभ 10 जनवरी से हो रहा है। 18 जनवरी तक चलने वाला यह आयोजन ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा 75’ थीम पर आधारित है, जिसमें 35 देशों के प्रकाशक, 3,000 से अधिक स्टॉल और निःशुल्क प्रवेश के साथ ज्ञान व संस्कृति का महाकुंभ सजेगा।

world book fair in indian : डिजिटल युग में जब सूचनाएं एक क्लिक की दूरी पर सिमट गई हैं, तब भी किताबों की महक और शब्दों की गहराई का आकर्षण कम नहीं हुआ है। इसी जीवंत साक्ष्य के रूप में नई दिल्ली एक बार फिर साहित्य, संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान के सबसे बड़े उत्सव की मेज़बानी के लिए तैयार है। राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में 53वें विश्व पुस्तक मेले का शुभारंभ शनिवार से हो रहा है, जो 18 जनवरी तक चलेगा। यह आयोजन न केवल पुस्तक प्रेमियों की प्रतीक्षा का अंत करेगा, बल्कि पढ़ने की संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगा।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के तत्वावधान में आयोजित यह विश्व पुस्तक मेला वर्ष 2026 में एक विशेष थीम के साथ लौट रहा है। इस बार मेले को भारतीय सीमाओं की सुरक्षा में तैनात देश के वीर जवानों को समर्पित किया गया है। स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मेले की थीम ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा 75’ निर्धारित की गई है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे के अनुसार, यह आयोजन भारतीय सशस्त्र सेनाओं के साहस, बलिदान और राष्ट्र-निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को सम्मान देने का प्रयास है।
नौ दिनों तक चलने वाले इस भव्य साहित्यिक आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे। उद्घाटन समारोह में कतर और स्पेन के प्रतिनिधिमंडलों की उपस्थिति इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी विशिष्ट बनाएगी। इस वर्ष विश्व पुस्तक मेले में 35 से अधिक देशों के 1,000 से ज्यादा प्रकाशक भाग ले रहे हैं, जबकि 3,000 से अधिक स्टॉल पर लाखों पुस्तकों का विशाल संग्रह पाठकों के लिए उपलब्ध रहेगा। मेले के दौरान 600 से अधिक साहित्यिक और बौद्धिक आयोजनों में 1,000 से अधिक वक्ता संवाद करेंगे, जिससे यह मंच विचार-विमर्श और ज्ञान-संवाद का केंद्र बन जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, इस बार विश्व पुस्तक मेले में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। यह निर्णय पुस्तकों और ज्ञान को समाज के हर वर्ग तक सुलभ बनाने की मंशा से लिया गया है। अनुमान है कि इस दौरान 20 लाख से अधिक पाठक, विद्यार्थी और साहित्य प्रेमी मेले में शिरकत करेंगे। विशेष रूप से जेन-जी को किताबों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही गतिविधियां और संवाद सत्र भी बिना किसी शुल्क के होंगे।
बच्चों और युवाओं के लिए यह पुस्तक मेला प्रेरणा का अनूठा अवसर भी लेकर आ रहा है। इस साहित्यिक महाकुंभ में नन्हे पाठकों को देश के गौरव, एस्ट्रोनॉट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से संवाद करने का अवसर मिलेगा। विज्ञान, अंतरिक्ष और सपनों की दुनिया से जुड़ी यह मुलाकात बच्चों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बनने वाली है, जहां किताबें न केवल ज्ञान देंगी, बल्कि भविष्य के सपनों को भी नई उड़ान देंगी।
कुल मिलाकर, भारत मंडपम में आयोजित होने जा रहा 53वां विश्व पुस्तक मेला केवल पुस्तकों का आयोजन नहीं, बल्कि विचार, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का उत्सव है। यह मंच एक बार फिर साबित करेगा कि तकनीक के इस दौर

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
