'Friend Request' बनी जाल : फेसबुक पर 'Friend Request' स्वीकार करना पड़ा भारी, साइबर ठगों ने बिछाया ऐसा जाल कि युवक के उड़ गए ₹18 लाख
फेसबुक पर "निधि मिश्रा" नाम की प्रोफाइल से दोस्ती पड़ी महंगी। कैंपियरगंज के युवक से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 18 लाख रुपये की साइबर ठगी। जानें कैसे काम करता है यह 'ट्रेडिंग ट्रैप' और खुद को कैसे सुरक्षित रखें।

Friend Request' turns into a trap
गोरखपुर (कैंपियरगंज): डिजिटल दुनिया में अनजान लोगों से दोस्ती करना कितना भारी पड़ सकता है, इसका एक खौफनाक उदाहरण गोरखपुर के कैंपियरगंज इलाके में सामने आया है। यहाँ एक युवक को फेसबुक पर मिली एक फ्रेंड रिक्वेस्ट ने 18 लाख रुपये का चूना लगा दिया। "अधिक मुनाफे" के लालच में फंसाकर जालसाजों ने युवक की जीवन भर की कमाई साफ कर दी।
कैसे शुरू हुआ ठगी का यह खेल?
मामला कैंपियरगंज के सहवनखोर गाँव का है। पीड़ित आनंद प्रकाश यादव ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले उन्हें फेसबुक पर "निधि मिश्रा" नाम की एक प्रोफाइल से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली थी। रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे जालसाज ने आनंद का भरोसा जीता और बातचीत फेसबुक से शिफ्ट होकर WhatsApp पर पहुँच गई।
'Hizcoin Shop' और फर्जी प्रॉफिट का मायाजाल
खुद को एक प्रोफेशनल ट्रेडर बताते हुए महिला (जालसाज) ने आनंद को ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाया। उसने आनंद को “Hizcoin Shop” नामक एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का लिंक भेजा और वहां अपनी आईडी बनाने को कहा।
भरोसा जीतने के लिए जालसाजों ने एक बड़े व्यापारी “हर्ष गोयनका” के नाम का सहारा लिया और दावा किया कि वे एक एक्सपर्ट ट्रेडर हैं जो निवेश पर भारी रिटर्न दिलाएंगे।
ऐसे बुना गया 18 लाख का 'ट्रेडिंग ट्रैप'
ठगों ने आनंद को सबसे पहले 50,000 रुपये निवेश करने के लिए राजी किया। जैसे ही आनंद ने पैसे लगाए, फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल पर उनका "मुनाफा" तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही दिनों में उनके अकाउंट में 57 लाख रुपये का काल्पनिक मुनाफा (Notional Profit) दिखने लगा।
जब आनंद ने इस पैसे को निकालने की कोशिश की, तो असली खेल शुरू हुआ:
जालसाजों ने कहा कि 57 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए उन्हें 'कमीशन' और 'टैक्स' के रूप में 18 लाख रुपये जमा करने होंगे।
लालच में आकर आनंद ने बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक, आईसीआईसीआई, पीएनबी और एसबीआई के विभिन्न खातों में RTGS और UPI के माध्यम से किश्तों में 18 लाख रुपये भेज दिए।
पैसे मिलते ही "निधि मिश्रा" का मोबाइल बंद हो गया और ट्रेडिंग साइट गायब हो गई।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
ठगी का अहसास होने पर आनंद ने साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया है। साइबर पुलिस अब उन बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन ट्रेल की जांच कर रही है जिनमें पैसा ट्रांसफर किया गया था। पुलिस के अनुसार, यह एक संगठित गिरोह है जो फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और बोगस वेबसाइट्स के जरिए लोगों को शिकार बनाता है। शुरुआती छोटे निवेश पर "मुनाफा" दिखाना इनकी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा होता है।
साइबर विशेषज्ञों की चेतावनी: इन बातों का रखें ध्यान
साइबर एक्सपर्ट्स ने इस घटना के बाद आम जनता के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- अनजान रिक्वेस्ट से बचें: सोशल मीडिया पर अनजान लोगों, खासकर जो निवेश की सलाह देते हैं, उनसे दूर रहें।
- मुनाफे का लालच: अगर कोई प्लेटफॉर्म बहुत कम समय में पैसा दोगुना करने या लाखों के मुनाफे का वादा करता है, तो वह 99% फर्जी है।
- कमीशन न दें: कोई भी वैध ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म अपना प्रॉफिट देने के लिए आपसे अलग से 'कमीशन' या 'विड्रॉल फीस' नहीं मांगता।
- वेबसाइट की जांच: किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी प्रमाणिकता चेक करें। फर्जी वेबसाइट अक्सर असली जैसी दिखती हैं लेकिन उनके यूआरएल (URL) में स्पेलिंग की गलतियां होती हैं।
क्या करें अगर आप ठगी का शिकार हो जाएं?
यदि आपके साथ भी ऐसी कोई घटना होती है, तो बिना समय गंवाए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। शुरुआती 1-2 घंटों में रिपोर्ट करने पर बैंक खातों को फ्रीज करने और पैसा वापस मिलने की संभावना काफी अधिक रहती है।
कैंपियरगंज की यह घटना एक सबक है कि इंटरनेट पर हर चमकती चीज सोना नहीं होती। सतर्कता ही साइबर अपराध से बचने का एकमात्र हथियार है।

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