संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता: भारत की दावेदारी को मिला फ्रांस का मजबूत समर्थन|
सुरक्षा परिषद में भारत समेत G4 देशों की स्थायी सदस्यता के लिए फ्रांस ने दी समर्थन की गूंज, सीटों की संख्या 25 करने का रखा प्रस्ताव।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्विपक्षीय चर्चा के दौरान।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना में व्यापक बदलाव और भारत की स्थायी सदस्यता की मांग ने एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के पटल पर जोर पकड़ लिया है। हाल ही में, भारत के रणनीतिक साझेदार फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत को स्थायी सीट देने का पुरजोर समर्थन किया है। फ्रांस का यह रुख न केवल भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, बल्कि यह उन वैश्विक शक्तियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है जो सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत कर रही हैं।
फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को भेजे गए एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से सुरक्षा परिषद में सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि ने अपने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन और इसे और अधिक समावेशी बनाने के लिए फ्रांस का संकल्प अटूट और ऐतिहासिक है। फ्रांस ने न केवल भारत, बल्कि G4 समूह के अन्य सदस्य देशों—जर्मनी, ब्राजील और जापान—को भी स्थायी सीट देने की वकालत की है। फ्रांस का मानना है कि वर्तमान सुरक्षा परिषद की संरचना 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है।
इस कूटनीतिक पहल के केंद्र में सुरक्षा परिषद का विस्तार है। फ्रांस का प्रस्ताव है कि सुरक्षा परिषद की सीटों की कुल संख्या को बढ़ाकर 25 तक किया जाना चाहिए, ताकि यह वर्तमान वैश्विक संतुलन को बेहतर ढंग से प्रदर्शित कर सके। वर्तमान में, सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य और दस अस्थायी सदस्य शामिल हैं, जो दो वर्षों के रोटेशन चक्र पर चुने जाते हैं। फ्रांस ने अफ्रीका महाद्वीप के लिए भी दो स्थायी सीटों की पुरजोर पैरवी की है, ताकि ऐतिहासिक रूप से चले आ रहे अन्याय को दूर किया जा सके।
इस बीच, यूरोपीय देश स्लोवाकिया ने भी भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर समर्थन किया है। प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हालिया वार्ता के दौरान इस विषय पर चर्चा की और स्पष्ट किया कि भारत जैसी उभरती हुई वैश्विक शक्ति का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होना अनिवार्य है। स्लोवाकिया की यह घोषणा भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते समर्थन को दर्शाती है।
फ्रांस और स्लोवाकिया जैसे देशों का समर्थन यह स्पष्ट करता है कि सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे में बदलाव की आवश्यकता अब एक वैश्विक सहमति बन चुकी है। भारत ने वर्षों से विकासशील देशों की आवाज के रूप में अपनी भूमिका निभाई है और संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी और प्रतिनिधिमूलक बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए हैं। जैसे-जैसे वैश्विक राजनीति जटिल होती जा रही है, सुरक्षा परिषद में भारत का स्थायी प्रतिनिधित्व न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए न्यायपूर्ण वैश्विक शासन की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
