चिकन नेक पर भारतीय रेलवे का बड़ा दांव! सिलीगुड़ी कॉरिडोर में बनेगी चौथी लाइन, 29 KM अंडरग्राउंड ट्रैक को मंजूरी|
भारत सरकार ने पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चिकन नेक कॉरिडोर में चौथी रेलवे लाइन के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।

चिकन नेक कॉरिडोर में रेलवे प्रोजेक्ट को समझाने के लिए नदी के किनारे पटरी पर दौड़ती ट्रेन और बांग्लादेश का प्रतीक चिह्न दर्शाया गया है|
भारतीय रेलवे ने पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर में एक और बड़े प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। बांग्लादेश की सीमा से सटे इस बेहद अहम क्षेत्र में भारतीय रेलवे द्वारा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाली चौथी रेलवे लाइन के निर्माण प्रस्ताव को भी आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों में त्वरित आवाजाही के लिहाज से एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने हाल ही में बिहार के कटिहार में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरी परियोजना की रणनीतिक अहमियत पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मालदा-न्यू जलपाईगुड़ी सेक्शन पूर्वोत्तर भारत को देश के शेष भागों से जोड़ने वाला इकलौता और अत्यंत महत्वपूर्ण भू-भाग है। इस सेक्शन की संवेदनशीलता और सामरिक महत्व को देखते हुए रेलवे ने अपनी क्षमता में व्यापक विस्तार करने का निर्णय लिया है। शुरुआती योजनाओं में इस खंड पर केवल तीसरी रेलवे लाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन बढ़ती जरूरतों और सुरक्षात्मक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अब चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को भी पूर्ण स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
जीएम चेतन कुमार श्रीवास्तव ने इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के तहत लगभग 29 किलोमीटर लंबी एक अंडरग्राउंड डबल लाइन परियोजना भी शामिल है, जो बागडोगरा तक विस्तृत होगी। यह इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व पहल है, जो आने वाले समय में इस पूरे क्षेत्र की भौगोलिक और सामरिक चुनौतियों से निपटने में रेलवे को पूरी तरह सक्षम बनाएगी। इसके साथ ही बारसोई सेक्शन में भी रेलवे लाइनों के दोहरीकरण का काम युद्धस्तर पर और तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि ट्रेनों के आवागमन में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर भौगोलिक रूप से उत्तर बंगाल में लगभग 60 किलोमीटर लंबा और मात्र 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा एक संकीर्ण भू-टुकड़ा है, जो सीधे तौर पर बांग्लादेश की सीमा के पास स्थित है। हाल के दिनों में पड़ोसी देश बांग्लादेश में उत्पन्न हुई राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता के बाद से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भारत सरकार और भारतीय रेलवे का इस क्षेत्र पर विशेष फोकस रहा है। देश की सुरक्षा और अखंडता को बनाए रखने के लिए इस मार्ग को निर्बाध और सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इन तमाम परियोजनाओं के मुकम्मल होने के बाद इस पूरे इलाके के रेलवे नेटवर्क का पूरी तरह से कायाकल्प हो जाएगा और पूर्वोत्तर के साथ संपर्क अभूतपूर्व रूप से मजबूत होगा।
यात्रियों की सुविधाओं और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए कटिहार डिवीजन के अंतर्गत भी कई बड़े ऐलान किए गए हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस डिवीजन में करीब 42 नई ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया है और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लगभग 250 नए स्टॉपेज भी बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन पर चल रहा आधुनिक विकास कार्य निर्धारित योजना के तहत अप्रैल 2027 तक पूरी तरह से मुकम्मल कर लिया जाएगा। जोगबनी, राधिकापुर और बालुरघाट जैसे सीमावर्ती तथा दूर-दराज के इलाकों से जल्द ही नई लोकल ट्रेन सेवाएं शुरू करने की दिशा में भी तेज प्रयास जारी हैं, जिससे सरहद के पास बसे इन क्षेत्रों के लोगों को मुख्यधारा से जुड़ने में और अधिक सुगमता होगी।
यात्री सुविधाओं के इस विस्तार क्रम में वंदे भारत ट्रेन सेवाओं को भी गुवाहाटी से आगे बढ़ाकर तिनसुकिया और अगरतला तक संचालित करने की व्यापक योजना तैयार की गई है। इस विस्तार से पूर्वोत्तर क्षेत्र के यात्रियों को देश के अन्य हिस्सों की तरह तेज, आधुनिक और अधिक आरामदायक रेल यात्रा का बेहतरीन अनुभव प्राप्त हो सकेगा। चिकन नेक कॉरिडोर में चौथी रेलवे लाइन की यह आधिकारिक मंजूरी और चल रहे तमाम बुनियादी ढांचे के विकास कार्य न केवल सामरिक और रणनीतिक सुरक्षा को एक नया आयाम देंगे, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास के नए द्वारों को भी सदा के लिए खोल देंगे।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
