Lok Sabha No Confidence Motion 2026 : भारतीय संसदीय इतिहास में लगभग चार दशकों के बाद एक ऐसा क्षण आया जिसने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और गहरा कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई तीखी बहस के बाद, बुधवार को सदन ने इसे ध्वनिमत से खारिज कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए न केवल स्पीकर की निष्ठा का बचाव किया, बल्कि विपक्षी नेताओं, विशेषकर राहुल गांधी के संसदीय आचरण पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। यह पूरा घटनाक्रम लोकतांत्रिक मर्यादाओं और सदन के नियमों की व्याख्या के इर्द-गिर्द घूमता रहा।

अविश्वास प्रस्ताव और विपक्ष के आरोप :

इस विवाद की जड़ें कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किए गए उस प्रस्ताव में थीं, जिसे इंडिया ब्लॉक के 118 सांसदों का समर्थन प्राप्त था। विपक्ष का मुख्य आरोप था कि स्पीकर ओम बिरला का रवैया 'पक्षपातपूर्ण' रहा है और उन्होंने निष्पक्षता बनाए रखने के बजाय कई महत्वपूर्ण मौकों पर सत्तापक्ष का साथ दिया। विपक्ष ने राहुल गांधी का माइक बंद करने और विपक्षी आवाजों को दबाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए इसे 'लोकतंत्र का वस्त्रहरण' करार दिया। सदन में प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष दिखा, जहाँ केसी वेणुगोपाल और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने पीठासीन सदस्य के चयन के आधार पर आपत्ति जताई।

अमित शाह का पलटवार : "सदन कोई मेला नहीं है"

अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने इसे संसदीय राजनीति के लिए एक 'अफसोसजनक पल' बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पीकर किसी एक दल का नहीं बल्कि पूरे सदन का संरक्षक होता है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि सदन नियमों के आधार पर चलता है, न कि मर्जी के मुताबिक। उन्होंने राहुल गांधी के संसदीय रिकॉर्ड के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि उनकी उपस्थिति पूर्व की लोकसभाओं में बेहद कम रही है और वे अक्सर महत्वपूर्ण सत्रों के दौरान विदेश दौरों पर रहते हैं। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति जर्मनी या सिंगापुर में हो, वह सदन में कैसे बोल सकता है? उन्होंने यह भी याद दिलाया कि माइक बंद होने की प्रक्रिया नियमों के उल्लंघन पर आधारित होती है, जो सत्तापक्ष के मंत्रियों (जैसे गिरिराज सिंह) पर भी समान रूप से लागू होती है।



सदन में अभूतपूर्व हंगामा और कानूनी पहलू :

चर्चा के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब अमित शाह ने राहुल गांधी के पुराने आचरण, जैसे प्रधानमंत्री से गले मिलना या सदन में अन्य संकेतों का जिक्र किया। इससे भड़के विपक्षी सांसद माफी की मांग करते हुए बेल (सदन के बीचों-बीच) में आ गए। कानूनी बारीकियों को साझा करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि जहाँ प्रधानमंत्री को हटाने के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है, वहीं स्पीकर को हटाने के लिए विशेष बहुमत अनिवार्य है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि वे प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएं, जिसका वे डटकर जवाब देंगे, लेकिन संवैधानिक पद (स्पीकर) की गरिमा को कम करना अनुचित है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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