एक युग का अंत – जननायक को अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब, बारामती की माटी में विलीन होंगे 'दादा'!

बारामती/पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति के एक ओजस्वी अध्याय का अवसान हो गया है। राज्य के उप-मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता अजीत पवार के आकस्मिक निधन से पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। 'दादा' के नाम से लोकप्रिय अजीत पवार के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक निवास, कांटेवाड़ी में रखा गया है, जहाँ सुबह से ही अपने नेता की एक झलक पाने के लिए समर्थकों, कार्यकर्ताओं और आम जनता का हुजूम उमड़ पड़ा है। प्रशासन के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान के मैदान में राजकीय सम्मान के साथ संपन्न किया जाएगा।

शोक संतप्त कांटेवाड़ी: अंतिम दर्शन का सिलसिला

अजीत पवार का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके कांटेवाड़ी स्थित निवास पर पहुँचा, वहां का माहौल गमगीन हो गया। नम आंखों के साथ लोग "अजीत दादा अमर रहें" के नारे लगा रहे हैं। राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी और विकास पुरुष माने जाने वाले पवार को श्रद्धांजलि देने के लिए महाराष्ट्र कैबिनेट के मंत्रियों समेत विपक्षी दलों के नेता भी पहुँच रहे हैं।

अंतिम संस्कार का आधिकारिक कार्यक्रम (Schedule)

प्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं:

  • प्रात: 08:00 - 11:00 बजे: पार्थिव शरीर को कांटेवाड़ी स्थित पैतृक निवास पर परिजनों और करीबी समर्थकों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।
  • पूर्वाह्न 11:30 बजे: निवास स्थान से अंतिम यात्रा की शुरुआत होगी, जो बारामती के मुख्य मार्गों से होकर गुजरेगी।
  • अपराह्न 01:30 बजे: पार्थिव शरीर को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान पहुँचाया जाएगा, जहाँ नागरिक और गणमान्य व्यक्ति पुष्पांजलि अर्पित कर सकेंगे।
  • अपराह्न 04:00 बजे: राजकीय सम्मान (State Honours) के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होगी। महाराष्ट्र पुलिस की टुकड़ी द्वारा उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया जाएगा।

सुरक्षा और व्यवस्था: छावनी में तब्दील हुई बारामती

अंतिम यात्रा में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए पुणे ग्रामीण पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

  • विद्या प्रतिष्ठान मैदान के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई है।
  • यातायात को सुचारू रखने के लिए बारामती शहर में कई जगहों पर रूट डायवर्ट किए गए हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के वरिष्ठ अधिकारी खुद व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं ताकि राजकीय प्रोटोकॉल का पूर्ण पालन सुनिश्चित हो सके।

एक राजनीतिक शून्य: महाराष्ट्र की राजनीति पर प्रभाव

अजीत पवार केवल एक उप-मुख्यमंत्री नहीं थे, बल्कि वे महाराष्ट्र की राजनीति की वह धुरी थे जिसके इर्द-गिर्द सत्ता का संतुलन बना रहता था। प्रशासनिक पकड़ और विकास कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें 'प्रशासन का मास्टर' बनाया। बारामती के कायाकल्प में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। विद्या प्रतिष्ठान, जहाँ उनका अंतिम संस्कार होना है, उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का जीवंत प्रमाण है।

अमिट यादें और भारी मन से विदाई

जैसे-जैसे सूरज ढलने की ओर बढ़ेगा, महाराष्ट्र अपने एक सबसे प्रभावशाली नेता को विदा करेगा। अजीत पवार का जाना न केवल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के लिए, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बारामती की जिस मिट्टी से उन्होंने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था, आज उसी मिट्टी में वे पंचतत्व में विलीन हो जाएंगे। उनकी विरासत और उनके द्वारा किए गए निर्णय आने वाले लंबे समय तक महाराष्ट्र की राजनीति को दिशा देते रहेंगे।

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