लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा-285 बूथों पर ड्रोन और छावनी के साये में फाल्टा विधानसभा में दोबारा मतदान शुरू|
ईवीएम गड़बड़ी की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग के आदेश पर दोबारा वोटिंग, सुरक्षा के लिए सीएपीएफ की 35 कंपनियां और ड्रोन तैनात।

फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में दोबारा मतदान के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए तैनात पुलिस और केंद्रीय बल के जवान।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आने वाली संवेदनशील और राजनीतिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण फाल्टा विधानसभा सीट पर गुरुवार को कड़े सुरक्षा घेरे के बीच पुनर्मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई। इस पूरे निर्वाचन क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर लोकतंत्र के इस महापर्व को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। सुबह सात बजे से शुरू हुआ यह मतदान शाम छह बजे तक अनवरत जारी रहेगा, जहां मतदाता भयमुक्त होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि इस पुनर्मतदान की त्वरित और सटीक गणना आगामी 24 मई को की जाएगी, जिसके बाद इस सीट का राजनीतिक भविष्य तय होगा।
कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, फाल्टा विधानसभा सीट पर सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व रणनीतिक तैयारियां की गई थीं। मतदान से ठीक एक दिन पहले ही सभी डिस्पर्सल सेंटरों से मतदान कर्मियों को कड़ी सुरक्षा के बीच उनके गंतव्य तक रवाना कर दिया गया था। किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने और असामाजिक तत्वों के हौसले पस्त करने के लिए पूरे क्षेत्र को एक तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने के उद्देश्य से इस बार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की करीब 35 कंपनियों को जमीन पर उतारा गया है। पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में किसी एकल विधानसभा क्षेत्र के लिए सुरक्षा बलों की यह तैनाती अब तक की सबसे बड़ी और व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक मानी जा रही है।
गौरतलब है कि फाल्टा विधानसभा सीट के लिए पहले दो चरणों के तहत 29 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ था। लेकिन उस दौरान कई मतदान केंद्रों से गंभीर चुनावी गड़बड़ियों, हिंसा और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें खुलकर सामने आई थीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि कई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर उनके प्रत्याशियों के नाम और पार्टी के चुनाव चिन्ह वाले बटनों को जानबूझकर सफेद टेप से ढक दिया गया था, ताकि मतदाता भ्रमित हो सकें। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए विशेष चुनाव पर्यवेक्षक सुभ्रत गुप्ता ने तत्काल फाल्टा क्षेत्र का स्थलीय दौरा किया और विस्तृत जांच की थी। उनकी द्वारा सौंपी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर भारत निर्वाचन आयोग ने संज्ञान लेते हुए पूर्व में हुए मतदान को रद्द कर पूरे निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का कड़ा और ऐतिहासिक आदेश जारी किया था।
सुरक्षा के इस नए खाके के तहत इस बार फाल्टा में पिछले मतदान की तुलना में सुरक्षा बलों की संख्या को दोगुना कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने के साथ-साथ किसी भी अप्रिय घटना या बूथ कैप्चरिंग की कोशिशों पर तत्काल लगाम लगाने के लिए 30 क्विक रिस्पांस टीमें (क्यूआरटी) हर वक्त मुस्तैद हैं। तकनीक के स्तर पर भी आयोग ने इस बार निगरानी को बेहद कड़ा कर दिया है। प्रत्येक मतदान केंद्र के भीतर दो अत्याधुनिक वेब कैमरे और बाहरी सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए एक कैमरा स्थापित किया गया है। पूरी मतदान प्रक्रिया की लाइव वेबकास्टिंग सीधे जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुख्यालयों में बने कंट्रोल रूम में प्रसारित हो रही है, जहां से वरिष्ठ अधिकारी सीधे स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों की टोह लेने के लिए रिमोट संचालित ड्रोन कैमरों का भी सहारा लिया जा रहा है।
इस पूरे चुनावी समर के बीच फाल्टा की राजनीति में उस समय एक नया मोड़ आया जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से पीछे हटने की घोषणा कर दी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह मुख्यमंत्री द्वारा क्षेत्र के लिए घोषित विकास पैकेज पर भरोसा जताते हुए इस मुकाबले से अलग हो रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग के नियमों के तकनीकी और कानूनी पहलुओं के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने साफ कर दिया कि जहांगीर खान का नाम और चुनाव चिन्ह ईवीएम मशीन में पूर्ववत बना रहेगा। चूंकि यह 29 अप्रैल को हुए चुनाव का ही एक कानूनी पुनर्मतदान है, इसलिए चुनावी प्रक्रिया के बीच में उम्मीदवारों के नामांकन या उनकी स्थिति में किसी भी प्रकार का बदलाव करना नियमसंगत नहीं है। इस तरह, कड़े पहरे और तकनीकी चौकसी के बीच फाल्टा का यह पुनर्मतदान बंगाल की सियासत में निष्पक्षता और कानून के शासन की एक नई नजीर पेश करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
