'एक बेबाक योद्धा का अंत':Raj Thackeray ने Ajit Pawar को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि, साझा किए 'दादा' के सियासी किस्से
बारामती विमान हादसे में अजित पवार के निधन पर राज ठाकरे ने साझा किया भावुक संदेश। 'दादा' की प्रशासनिक पकड़, बेबाकी और जातिवाद मुक्त राजनीति को किया सलाम। जानें राज ठाकरे की नज़र में कैसे थे अजित पवार और क्यों उनका जाना महाराष्ट्र की 'उमदा राजनीति' के लिए एक काला अध्याय है। विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Ajit Pawar political legacy analysis : बारामती विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन ने न केवल सत्ता के गलियारों को सुन्न कर दिया है, बल्कि धुर विरोधियों की आंखों में भी आंसू ला दिए हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने एक अत्यंत भावुक और विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने 'मित्र' अजित दादा को श्रद्धांजलि अर्पित की। ठाकरे का यह संदेश केवल एक शोक संवेदना नहीं, बल्कि अजित पवार के उस व्यक्तित्व का आईना है, जिसने चार दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति को अपने ढंग से परिभाषित किया।
"शरद पवार साहब की छाया से निकलकर बनाई अपनी पहचान"
राज ठाकरे ने अपनी पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि अजित पवार की राजनीतिक परवरिश शरद पवार जैसे दिग्गज के सानिध्य में हुई, लेकिन उन्होंने बहुत जल्द अपनी एक स्वतंत्र और अमिट पहचान बनाई। ठाकरे लिखते हैं:
- प्रशासनिक कुशलता: अजित दादा का प्रशासन पर ऐसा नियंत्रण था कि वे जटिल से जटिल फाइलों की गुत्थी सुलझाने में माहिर थे। जब नौकरशाही हावी होने लगती थी, तब अजित पवार जैसे नेता का होना महाराष्ट्र के लिए सुरक्षा कवच जैसा था।
- विकास के दो स्तंभ: पिंपरी-चिंचवड और बारामती का कायाकल्प अजित पवार की कार्यशैली के जीवंत उदाहरण हैं। राज ठाकरे के अनुसार, उनके राजनीतिक विरोधी भी इस विकास गाथा को नकार नहीं सकते।
- जातिवाद से कोसों दूर: वर्तमान दौर की 'जातिगत राजनीति' पर प्रहार करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि अजित पवार उन बिरले नेताओं में से थे जिनके काम और निर्णयों में जातिवाद के लिए कोई स्थान नहीं था।
स्पष्टवादिता की कीमत और दिलदार विरोध :
राज ठाकरे ने अजित पवार के उस गुण का विशेष उल्लेख किया जो अक्सर विवादों का कारण भी बना—उनका सफेद झूठ के बजाय कड़वा सच बोलना। ठाकरे ने कहा:
"अजित पवार कमाली के स्पष्टवक्ता थे। काम नहीं होना हो तो मुंह पर मना कर देते थे और होना हो तो पूरी ताकत झोंक देते थे। राजनीति में इस सडेतोडपन (बेबाकी) की भारी कीमत चुकानी पड़ती है, जिसका अनुभव मुझे भी है और दादा ने भी इसे बखूबी सहा।"
ठाकरे ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति से 'दिलदार विरोधक' (उदार विरोधी) एक-एक कर कम होते जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध कभी व्यक्तिगत नहीं होना चाहिए और अजित पवार इस परंपरा के अंतिम स्तंभों में से एक थे।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
